अपने नाखून काटते समय क्या आप इन बातों के बारे में सोचते हैं ?

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हेल्थ कार्नर :-   नाखूनों का मुख्य काम हाथों को खूबसूरती देना नहीं बल्कि अँगुलियों की सुरक्षा करना है. वैसे तो नाखूनों के बारे में अधिक सोचा नहीं जाता है और ना ही इसके स्वास्थ्य को लेकर इतनी बातें होती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि त्वचा विज्ञान में नाखून का एक अलग महत्त्व होता है और इस को लेकर काफी शोध भी किये गए हैं. नाखूनों के बारे में कुछ ऐसी बाते जानिये, जो कि शायद आपको पहले पता नहीं होंगी.

अपने नाखून काटते समय क्या आप इन बातों के बारे में सोचते हैं ?

1. एक दिन में 0.1 मिलीमीटर बढ़ते हैं: वैसे तो नाखून प्रति माह 3 से 4 मिलीमीटर तक बढ़ते हैं. लेकिन प्रतिदिन इनकी लम्बाई 0.1 मिलीमीटर बढ़ती है. गर्मियों में नाखून अधिक तीव्रता से बढ़ते हैं, क्योंकि उस समय में सूर्य की गर्मी से शरीर को अधिक विटामिन डी प्राप्त होता है, जो कि नाखून बढ़ने के लिए मुख्य कारक है.

2. नाखूनों से दिल, फेफड़ों और जिगर के रोगों का पता चलता है: आधे गेहुएं और आधे गुलाबी रंग के नाखून गुर्दे के रोग का निशान होते हैं. भूरे नाखून जिगर के रोगों की पहचान हैं और नाखूनों के चारों ओर मोटी परत दिल के रोगों को दर्शाती है.

3. छोटे से नाखून के चार भाग: शायद बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि नाखून के चार भाग होते हैं- मैट्रिक्स, नेल प्लेट, नेल बेड और नाखून के चारो तरफ की त्वचा. नाखून के चारों ओर की त्वचा के बारे में तो सभी को पता होगा. नाखून के चारो ओर का हिस्सा मैट्रिक्स कहलाता है. आगे का भाग, जो कि काटा जाता है उसको नेल प्लेट कहते हैं और पिछले हिस्से हो नेल बेड कहते हैं.

4. प्राचीन काल में नाखून सजाना सामाजिक प्रतिष्ठा की निशानी था: नाखूनों की साज-सज्जा प्राचीन काल से ही चली आ रही है. चीन में तो मिंग वंश के महिला और पुरुष अपने नाखून बहुत लम्बे करके उनको सुनहरे रंग से रंगा करते थे.

5. पहला नेल कटर 1875 में बना था: 1857 से बहुत पहले लोग अपने नाखूनों को बेहद नुकीली धार वाले पत्थरों की सहायता से काटा करते थे. उसके बाद चाकू की सहायता से नाखून काटे जाने लगे थे. बाद में 1875 में वैलेंटाइन फोगेर्टी ने नेल कटर का अविष्कार किया.