इन 3 राशि वालों के लिए विवाह रहेगा वर्जित, जानिये सभी राशियों पर बृहस्पति का असर

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देवगुरु बृहस्पति शुक्रवार को राशि परिवर्तन करेंगे। नवग्रहों में गुरु का गोचर सभी राशियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। गोचर के दौरान गुरु अपनी राशि में एक साल के बाद प्रवेश करते हैं। गुरु, धनु व मीन राशि के स्वामी ग्रह हैं। गुरु ग्रह की स्थिति स्त्री जातकों की पत्रिका में बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। पंडित रमाकांत मिश्रा बताते हैं की ज्योतिष में स्त्री की कुंडली में पति का नैसर्गिक कारक गुरु को माना जाता है। जिन स्त्रियों की कुंडली में गुरु की स्थिति सही नहीं होती या गुरु अस्त, वक्री, निर्बल स्थित में होता है तो उसे पतिसुख नहीं मिल पाता। देव गुरु धनु राशि में प्रवेश करने जा रहे है। इस गोचर के कारण जिन स्त्री जातकों की राशि से गुरु अपूज्य स्थान गोचर करेंगे, उन स्त्री जातकों का विवाह 1 साल तक के लिए वर्जित रहेगा। इसके साथ ही जिन स्त्री जातकों की राशि से गुरु पूज्य स्थान में गोचर करेंगे, उनका विवाह गुरु शांति अनुष्ठान यानी पीली पूजा संपन्न करने के बाद किया जा सकता है।

गुरु का राशि परिवर्तन: इन 3 राशि वालों के लिए विवाह रहेगा वर्जित, जानिये सभी राशियों पर इसका असर

गुरु का गोचर इन राशियों की स्त्री जातकों के विवाह में उत्पन्न करेगा बाधा

1. अपूज्य- वृषभ, कन्या, मकर, (विवाह वर्जित)
2. पूज्य- धनु, तुला, कर्क, मीन (गुरु की शांति के उपरांत विवाह)

मेष राशि
मेष राशि वालों के नवम भाव में गुरु का परिवर्तन शुभ फल प्रदान करेगा। भूमि, वाहन आदि सुखों की प्राप्ति होगी। केसर का तिलक बृहस्पतिवार के दिन माथे पर लगाएं। वैभव में वृद्धि एवं अविवाहितों के विवाह का योग बनेंगे।

वृषभ राशि
वृषभ राशि वालों के अष्टम भाव में गुरु का परिवर्तन स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दे सकता है। भूमि-भवन से जुड़ी योजनाओं में बाधाएं उत्पन्न हो सकती है। वहीं व्यर्थ की चिंता बढ़ा सकती हैं। कार्य-व्यवहार में विशेष सावधानी बरतें।

मिथुन राशि
मिथुन राशि वालों के सप्तम भाव में गुरु का परिवर्तन शुभ फलदायक है। दांपत्य जीवन में शुभता आएगी। प्रभावशाली व्यक्तियों से संपर्क और लाभ प्राप्त होगा। विवाह योग्य युवक-युवतियों का विवाह संपन्न होगा।

कर्क राशि
कर्क राशि वालों के षष्ठम भाव में गुरु का परिवर्तन शत्रु भय, ऋण-रोग, आय से अधिक व्यय की परिस्थितियां पैदा करेगा। किसी से वाद-विवाद न करें। केले के पेड़ को जल चढ़ाएं।

सिंह राशि
सिंह राशि वालों के पंचम भाव में गुरु का परिवर्तन भाग्योदय का कारक है। विद्यार्थियों के लिए परीक्षा परिणाम मनोनुकूल रहेगा। इससे सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। व्यापारियों के धन लाभ में बढ़ोतरी, समस्याओं का अंत होगा।

कन्या राशि
कन्या राशि वालों के चतुर्थ भाव में गुरु का परिवर्तन माता-पिता के स्वास्थ्य को लेकर परेशानी बढ़ा सकता है। इस दौरान आपको मानसिक अशांत एवं तनाव हो सकता है। वाहन धीमी गति से चलाऐं, निवेश आदि सोच-समझकर सावधानीपूर्वक करें।

तुला राशि
तुला राशि वालों के तृतीय भाव में गुरु का परिवर्तन मिश्रित फल प्रदान करेंगे। इस दौरान आपको बहुत ही कठिनाई से धन प्राप्त होगा। पराक्रम में वृद्धि लेकिन आकस्मिक खर्च, ट्रांसफर, व शारीरिक कष्ट हो सकता है।

वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि वालों के द्वितीय भाव में गुरु का परिवर्तन धनलाभ के योग बनाता है। स्थायी संपत्ति में वृद्धि, पुत्र सुख एवं यश प्राप्त होगा। मान-सम्मान एवं प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

धनु राशि
धनु राशि वालों के प्रथम भाव में गुरु का परिवर्तन पहले से चली आ रही समस्याओं का निदान करेगा। हालांकि अज्ञात भय, ट्रांसफर, मानसिक उलझनें एवं संघर्षों के बाद धन लाभ एवं कार्य में प्रगति प्राप्त होगी।

मकर राशि
मकर राशि वालों के द्वादश भाव में गुरु का परिवर्तन ट्रांसफर, मनोरंजन कार्यों में धन का व्यय, निरंतर मानसिक अशांति एवं आंतरिक भय से मुक्ति पाने के लिए गुरुवार का व्रत करें व केले के वृक्ष के नीचे सायंकाल घी का दीपक प्रज्जवलित करें।

कुंभ राशि
कुंभ राशि वालों के एकादश भाव में गुरु का परिवर्तन भाग्योदय कारक है। मान-सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ेगी। प्रमोशन, धन लाभ, अविवाहितों का विवाह संपन्न होगा।

मीन राशि
मीन राशि वालों के दशम भाव में गुरु का राशि परिवर्तन सामान्य फलदायी है। कार्यक्षेत्र में परिवर्तन, नौकरीपेशा वालों को उच्चाधिकारियों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है।