इस दिन जलाए जाते हैं 14 दीपक, जानें क्या है इसकी वजह

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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को बैकुंठ चतुर्दशी मनाई जाती है। शास्त्रों के अऩुसार इस दिन व्रत-उपवास किया जाता है और नदी, सरोवर या तालाब के किनारे 14 दीपक जलाए जाते हैं। कार्तिक मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है, यह माह विष्णु जी को बेहद प्रिय होता है। परंपरा के अनुसार इस दिन 14 दीपक नदी किनारे जलाए जाएंगे। लेकिन क्या आपको पता है नदी किनारे दीपक जलाने के पीछे एक पौराणिक महत्व है, जिसके चलते यह परंपरा निभाई जा रही है। आइए जानते हैं इसका पौराणिक महत्व….

इस दिन जलाए जाते हैं 14 दीपक, जानें क्या है इसका कारण

14 दीपक जलाने के पीछे का पौराणिक महत्व

एक बार भगवान श्री विष्णु काशी में भगवान शिव का पूजन करने पहुंचे। वहां मणिकर्णिका घाट पर स्नान कर श्री विष्णु ने 1,000 स्वर्ण कमल पुष्पों से भगवान विश्वनाथ के पूजन का संकल्प किया। लेकिन जब वे पूजन करने लगे तो महादेव ने उनकी भक्ति की परीक्षा लेने के लिए एक कमल पुष्प कम कर दिया। अचानक एक कमलपुष्प कम देखकर विष्णु जी ने यह सोचा कि मेरी आंखें भी तो कमल जैसी ही हैं और उन्हें चढ़ाने को प्रस्तुत हुए। तब महादेव प्रकट हुए और बोले, हे हरि! तुम्हारे समान संसार में दूसरा कोई मेरा भक्त नहीं है।

इस दिन जो मनुष्य भक्तिपूर्वक पहले आपका पूजन करेगा, वह बैकुंठ को प्राप्त होगा। पुराणों के अऩुसार जो मनुष्य इस दिन 1,000 कमल पुष्पों से भगवान विष्णु के बाद भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं, वे सभी बंधनों से मुक्त होकर बैकुंठ धाम को प्राप्त होते हैं। पुरुषार्थ चिंतामणि में वर्णित जानकारी के अनुसार इसी दिन शिवजी ने श्रीहरि विष्णु को सुदर्शन चक्र प्रदान किया था। इस दिन व्रत कर तारों की छांव में सरोवर, नदी इत्यादि के तट पर 14 दीपक जलाने की परंपरा मनाई जा रही है।