इस दिन विष्णु जी के इस स्वरुप की करें आराधना, बन रहा बेहद शुभ संयोग

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सोमवार का दिन भगवान शिव का सबसे पवित्र दिन माना जाता है। वहीं एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित बहुत शुद्ध दिन माना जाता है। ऐसे में सोमवार के दिन उत्पन्ना एकादशी का पड़ना बेहद शुभ संयोग बना रहा है। क्योंकि मार्गशीर्ष माह की एकादशी के दिन ही एकादशी उत्पन्न हुई थी और इसी दिन से एकादशी व्रत की शुरुआत हुई थी। इस दिन से ही एकादशी का व्रत किया जा रहा है। सामान्यतः एकादशी पर हम भगवान विष्णु की पूजा और कथा करते हैं। लेकिन इस बार शुभ योगों में एकादशी के पड़ने से इस बार विष्णु जी के स्वरुप कान्हा की पूजा की जाएगी। एकादशी पर कान्हा जी के बाल-गोपाल स्वरुप की पूजा की जाएगी, वहीं इस स्वरुप की पूजा करने से भक्तों को उनकी विशेष कृपा प्राप्त होगी। आइए जानते हैं विष्णु जी के वाल स्वरुप की पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान…

इस दिन विष्णु जी के इस स्वरुप की करें आराधना, बन रहा बेहद शुभ संयोग

1. बाल गोपाल की मूर्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करवाएं। इसके बाद बाल गोपाल का श्रंगार कर उन्हें लड्डू का भोग लगाएं। एक बात ध्यान रखें की गोपाल जी को स्नान कराए बिना भओग नहीं लगाना चाहिए।

2. भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण दोनों की पूजा में तुलसी का बहुत ही ज्यादा महत्व माना गया है। भगवान को प्रसाद अर्पित करने से पहले उसमें तुलसी का पत्ता जरूर डालना चाहिए। ब‌िना तुलसी के श्रीकृष्ण की पूजा अधूरी मानी जाती है।

3. भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में स्टील या लोहे से बने दीपक और बर्तन का उपयोग ना करें। सिर्फ मिट्टी या तांबे का बना दीपक और उन्हीं बर्तनों का उपयोग करें। इसके साथ ही याद रखें की दीपक के नीचे थोड़े-से चावल जरूर रख दें।

4. कई बार लोग भगवान की मूर्ति पर फूल चढ़ाकर उन्हें वहीं छोड़ देते हैं, लेकिन ऐसा करना गलत होता है। फूलों को एक दिन से ज्यादा मंदिर में नहीं रखना चाहिए। खराब होने से पहले हटा देना चाहिए।

5. सारी रात भजन-कीर्तन आदि करना चाहिए। जो कुछ पहले जाने-अनजाने में पाप हो गए हों, उनकी क्षमा माँगनी चाहिए।