इस मंत्र के जाप से बदल जाता है बुरे सपनों का फल, मिलता है सौभाग्य

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अक्सर खराब सपने व्यक्ति को हिलाकर रख देते हैं। सुबह उठते ही अशुभ स्वप्न आने से व्यक्ति उदास हो जाता है और बुरी आशंका से व्यथित भी हो जाता है। प्राचीन शास्त्रों में खराब सपनों के प्रभाव को दूर करने और दुस्वप्न बार-बार न आए इसके लिए कई उपाय बताए हैं। अग्निपुराण में लिखा है कि ‘अद्यानो देव! सवितज्र्ञेयं दु:स्वप्ननाशनम्।’ (अ.पु. 261.5) अर्थात् ‘अद्या नो देव सवित:’ इस वेदमंत्र के जप से दुस्वप्न नहीं आते हैं और जप करने वाले को अच्छी व गहरी नींद आती है।

इस मंत्र के जाप से बदल जाता है बुरे सपनों का फल, मिलता है सौभाग्य

एकाग्रता पाने और मानसिक शांति के लिए भी इस मंत्र का उपयोग किया जा सकता है। आजकी जीवनशैली के चलते ज्यादातर लोग अनिद्रा और खंडनिद्रा (बार-बार नींद का का उचटना) के शिकार हैं। इन दोषों को दूर करने में भी यह मंत्र खासा उपयोगी रहेगा। रात्रि में सोते समय ग्यारह बार निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करना लाभ देता है।

मंत्र का अर्थ:  हे सविता देव! आज हमें आप सन्तति सहित पुनीत ऐश्वर्य देवें। दुखप्रद स्वप्नों, दरिद्रता और चिंताओं को हमसे दूर करें।