एक ऐसा आश्रम जहां सिर्फ व सिर्फ होती है कौए की पूजा, वजह जानकर होगी हैरानी

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हिन्दू धर्म में कहा जाता है कि सभी जीव-जंतु में इश्वर वास करते हैं। कई मौके पर हम लोग अक्सर देखते हैं कि जीव-जंतु, पक्षी की पूजा होती है लेकिन आज हम आपको ऐसे आश्रम के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां सिर्फ व सिर्फ कौए की पूजा होती है।

ऐसे आश्रम होती है कौए की पूजा, वजह जान हो जाएंगे हैरान

दरअसल, महाराष्ट्र के औरंगाबाद से लगभग 12 किलोमीटर दूर शिरडी-मुंबई हाईवे पर एक आश्रम है। कहा जाता है कि यह आश्रम पत्नी पीड़ित पतियों के लिए खोला गया है। बताया जाता है कि यहां सिर्फ पत्नी से प्रताड़ित पति ही रहते हैं। आश्रम जरूरी सलाह और कानूनी लड़ाई लड़ने में मदद करता है और पीड़ितों को सलाह भी देता है।

कौए की होती है यहां पूजा

इस आश्रम के ऑफिस थर्माकोल से बनाकर एक कौआ रखा गया है। बताया जाता है कि हर दिन सुबह-शाम उसकी पूजा की जाती है। यहां रहने वाले लोगों को मानना है कि मादा कौआ तो अंडा देखर उड़ जाती है लेकिन नर कौआ को चूजों का पालन पोषण करना पड़ता है। कुछ ऐसी ही स्थिति पत्नी पीड़ित पति का भी होता है। यही कारण है कि कौए की प्रतिमा की पूजा होती है।

19 नवंबर 2016 को खोला गया था आश्रम

यह आश्रम 19 नवंबर 2016 को खोला गया था। आश्रम के संस्थापक भी पत्नी पीड़ित ही हैं। उनका नाम भारत फुलारे है। उनके ऊपर उनकी पत्नी ने घरेलू हिंसा का केस दर्ज करा रखा है। उनके सहयोग में तुषार वखरे व अन्य तीन-चार लोग है, सभी पत्नी पीड़ित हैं।

आश्रम में हैं तीन रूम

1200 स्क्वायर फीट में बने इस आश्रम में तीन रूम है। यहां रहने वाले लोग ही खुद के लिए खाना बनाते हैं। यहां जो भी सलाह लेने आता है, उसे खिचड़ी बनाकर खिलाई जाती है।

पीड़ितों की तीन कैटेगरी

आश्रम में ए, बी और सी कैटेगरीज बनाई गई हैं। वह व्यक्ति, जो पत्नी या ससुरालवालों से प्रताड़ित होने के बावजूद डरकर वो सामने नहीं आता, वैसे व्यक्ति को सी कैटेगरी में रखा गया है। जिस व्यक्ति को पत्नी से शिकायत है, लेकिन समाज उसे क्या कहेगा? ये सोचकर चुपचाप बैठता है वो बी कैटेगरी में आता है। वैसे लोग ए कैटेगरी में रखे गए हैं, जो बिना डरे और समाज के परवाह किए बिना सामने आता है, मदद की गुहार लगाता है।

आश्रम में रहने के लिए नियम

ऐसा नहीं है कि इस आश्रम में कोई भी आकर रह लेगा। यहां रहने के लिए नियम भी बनाए गए हैं… जैसे कि पत्नी की ओर से कम से कम 20 केस दाखिल होना जरूरी है। गुजारा भत्ता नहीं चुकाने पर जेल गया हो। इसके अलावा पत्नी द्वारा केस दाखिल करने के बाद नौकरी चली गई हो। यहां रहने वाले दूसरी शादी करने का विचार कभी भी मन में न लाए। इन सब के साथ आश्रम में रहने वालों को योग्यता के अनुसार काम भी करना होगा।

सप्ताह में दो दिन होती है काउंसलिंग

इस आश्रम में हर शनिवार और रविवार को पत्नी-पीड़ितों की काउंसलिंग की जाती है। बताया जाता है कि शुरू में केवल शहर और आसपास के लोग आते थे, अब तो अन्य प्रदेश से भी पत्नी पीड़ित यहां पहुंचते हैं और उनकी काउंसलिंग की जाती है।