क्या आप जानते है कृष्ण और बलराम से दुर्योधन का संबंध? क्लिक करके पढ़े

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महाभारत में कृष्ण और अर्जुन के रिश्ते के बारे में तो सब जानते है। लेकिन बहुत कम लोग है कृष्ण और बलराम से दुर्योधन से क्या संबंध था। भगवान कृष्ण, अर्जुन के ना सिर्फ सखा थे बल्कि उसके मार्गदर्शक भी थे। पग पग पर उन्होंने अर्जुन का मार्गदर्शन किया था।

ky कृष्ण और बलराम से दुर्योधन का क्या संबंध था?

महाभारत के युद्ध में भी भगवान कृष्ण कौरवों के विरुद्ध अर्जुन के सारथी बन रथ को हांका था। इसके बावजूद यह कहा जाए कि भगवान् श्री कृष्ण का करीबी रिश्ता अर्जुन से नहीं से नहीं दुर्योधन से था तो? तो अब आप जानिए किस प्रकार था कृष्ण और बलराम से दुर्योधन का संबंध।

 

महभारत की एक कथा के अनुसार रामायण के एक प्रमुख पात्र जामवंत के साथ श्री कृष्ण का युद्ध हुआ। जब जामवंत को पता चला कि श्री कृष्ण ही त्रेता में राम थे तो जामवंत ने उनसे क्षमा मांगी और अपनी पुत्री जामवंती का विवाह श्री कृष्ण से कर दिया।

 

कृष्ण की रानी जामवंती से एक साम्ब नाक का राजकुमार का जन्म हुआ। राजकुमार साम्ब जब बड़ा हुआ तो वे दुर्योधन की पुत्री लक्ष्मणा से प्रेम करने लगे। साम्ब और लक्ष्मणा जानते थे कि कौरव कभी भी उन दोनों का विवाह नहीं होने देंगे। लक्ष्मणा के विवाह के लिए दुर्योधन ने स्वयंवर का आयोजन किया। जब साम्ब को ये पता चला तो वो स्वयंवर से पहले ही हस्तिनापुर पहुंच गया और राजकुमारी लक्ष्मणा को भगा कर ले जाने लगा।

 

जब कौरवों को इस बात की भनक लग गई तो उन्होंने साम्ब को बंदी बना लिया। कृष्ण के पुत्र को बंदी बनाने के बारे में जब द्वारका में पता चला तो सभी युद्ध की तैयारी करने लगे। उस समय कृष्ण के बड़े भाई बलराम ने युद्ध ना लड़ने का कहा और लक्ष्मणा और साम्ब को लाने के लिए स्वयं हस्तिनापुर गए। वहां जाने के बाद उन्होंने दुर्योधन को दोनों का विवाह कराकर सम्मानपूर्वक विदा कराने के लिए कहा।

 

इस पर कौरवों ने भरी सभा में बलराम का उपहास किया और शादी कराने के लिए मना कर दिया। इस अपमान से क्रुद्ध होकर बलरामजी ने अपने हल से हस्तिनापुर को धरती से उखाड़ दिया और खींच कर गंगा नदी की तरफ ले जाने लगे। कौरवों ने जब ये देखा तो उन्हें समझ में आया कि यदि बलराम की बात नहीं मानी तो वो पूरी हस्तिनापुर नगरी को ही तहस नहस कर देंगे।

 

इससे घबराए कौरवों ने बलराम की बात मान ली और राजकुमार साम्ब और राजकुमारी लक्ष्मणा को विवाह करवा कर सम्मान पूर्वक विदा करवा दिया। इस प्रकार कृष्ण के पुत्र का विवाह दुर्योधन की पुत्री से हुआ। इसलिए दुर्योधन ना चाहते हुए भी श्री कृष्ण के संबंधी बन गए।