जानिए अश्वगंधा के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज के बारे में, आप अभी

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हेल्थ कार्नर :-   पूरे भारतवर्ष में विशेषकर शुष्क प्रदेशों में अश्वगंधा के जंगली या कृषिजन्य पौधे 5,500 फुट की ऊंचाई तक पाये जाते हैं। उसके साथ ही अश्वगंधा एक साल तक यथाविधि सेवन करने से शरीर रोग रहित हो जाता है। केवल सर्दियों में ही इसके सेवन से दुर्बल व्यक्ति भी बलवान होता है।

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उसके साथ ही अश्वगंधा चूर्ण, तिल व घी 10-10 ग्राम लेकर और 3 ग्राम शहद मिलाकर नित्य सर्दी में सेवन करने से कमजोर शरीर वाला मोटा हो जाता है। अश्वगंधा के 3 ग्राम चूर्ण को 3 ग्राम घी में मिलाकर, 1 ग्राम शक्कर मिलाकर सुबह-शाम खाने से संधि वात दूर होता है। अश्वगंधा की 15 ग्राम कोंपलें या कोमल पत्ते लेकर 200 मिलीलीटर पानी में उबालें जब पत्ते गल जाए या नरम हो जायें तो छानकर गर्म-गर्म 3-4 दिन पीए, इससे कफ जन्य खांसी भी दूर होती है।