तुतलाना बन सकती है समस्या, जानिए कैसे

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हेल्थ कार्नर :-    बच्चे के मुख से पहला सार्थक शब्द सुनना हर माता-पिता के लिए एक सुखद क्षण होता है। जब वह तुतलाकर बोलने की चेष्टा करता है तो उनका हृदय हर्ष से गदगद् हो जाता है। बच्चे की यह अवस्था काफी मोहक होती है, परंतु देखा गया है कि कुछ बच्चे ठीक समय पर बोलना नहीं सीख पाते। 3-4 वर्ष के होने पर भी वे बोलने की चेष्टा भी नहीं करते और कुछ बच्चे अपने अटपटे, अस्पष्ट उच्चारण के साथ थोड़े ही शब्द बोल सकते हैं। इसके साथ-साथ कुछ बच्चे 15-16 मास की आयु में बोलना शुरू तो कर देते हैं, फिर भी उनमें स्थिरता अथवा निरंतरता नहीं आती। वे एकाएक बोलना बंद कर देते हैं या बोलने में आगे बढ़ने की बजाए पीछे की ओर हटते हैं।

तुतलाना बन सकती है समस्या, जानिए क्यों

अतः इन बच्चों का शब्द ज्ञान अपनी उम्र के बच्चों की तुलना में अल्प या संकुचित होता है और वे शब्द जानते भी हैं तो उनमें संज्ञा शब्दों की बहुलता होती है, जिससे वे अपनी आंतरिक आवश्यकताओं व इच्छाओं को मुश्किल से व्यक्त कर पाते हैं। ये बच्चे शब्दों की अपेक्षा संकेतों का अधिक सहारा लेते हैं और ये कई ध्वनि निकाल ही नहीं सकते। जैसे- घोड़े को घोरे, काला को ताला आदि।