दशामाता के स्मरण से दूर हो जाती हैं लाखों बाधाएं,जरूर जाने

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देवी आराधना के लिहाज से वागड़ अंचल के प्रमुख पर्व दशामाता व्रत की तैयारियां शुरू हो गई हैं। परिवार में सुख-समृद्धि की कामनार्थ चैत्र कृष्ण दशम को किए जाने वाले दशामाता व्रत को लेकर उत्साह है। हालांकि तिथियों के क्षय की वजह से शनिवार एवं रविवार दोनों दिन व्रत किया जाएगा। व्रतार्थी शुक्रवार देर शाम तक व्रत करने के उचित दिन के बारे में जानकारी जुटाते रहे। भक्तों ने व्रत की पूजन सामग्री आदि क्रय करनी शुरू कर दी है।

दशामाता के स्मरण मात्र से दूर हो जाती हैं लाखों बाधाएं
भक्त लाए पीला धागा
दशा माता व्रत में विशेष पूजन सामग्री काम में ली जाती है। शहर के विभिन्न मार्गों पर दशामाता व्रत के एक दिन पहले विशेष पीला धागा, सूत का धागा, चूड़ी, कुमकुम आदि घर लाए। व्रतार्थी पूरा दिन व्रत कर नया धागा धारण करेंगे और पुराना मंदिर में छोड़ेंगे।
मोदक खाकर काम पर लौटेंगे
होली के दस दिन बाद दशामाता व्रत कर वागड़ अंचल के लोग नए वर्ष की शुरुआत करते हैं। रोजगार के उद्देश्य से गुजरात, महाराष्ट्र आदि जाने वाले लोग होली पर आते हैं। दशामाता व्रत पर बनने वाले विशेष मोदक खाकर ही काम पर वापस लौटते हैं।
यह कहता है शास्त्र
शास्त्री बालमुकुन्द धम्बोला के अनुसार एकादशी की तिथि क्षय होने की वजह से इस बार दशामाता व्रत दो दिन किया जाएगा। शनिवार सुबह साढ़े दस बजे दशम तिथि शुरू होगी और यह रविवार सुबह साढ़े सात बजे तक रहेगी। वैष्णव पंथ एवं शास्त्रों के अनुसार उद्या तिथि का दिन ही मान्य होता है। इस लिहाज से रविवार को व्रत करना श्रेष्ठ रहेगा। पूजा के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त रविवार सुबह साढ़े पांच से साढ़े सात बजे होगा। शनिवार को व्रत करने वाले भक्त सुबह साढ़े नौ से एक बजे तक पूजा करंे, तो श्रेष्ठ होगा। एकादशी तिथि क्षय होने से प्रदोष व्रत सोमवार को किया जाएगा।