पापमोचनी एकादशी के दिन व्रत रखने से अनजाने में हुए पापों से मिलती है मुक्ति,क्लिक करके जाने

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मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। धर्म के अनुसार इस संसार में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति कभी ना कभी कोई ना कोई पाप भी जरुर करता है। इसलिए उसे अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए एकादशी का व्रत रखना चाहिए। यह जातक के सभी पापों से मुक्ति दिलाता है। पापमोचिनी एकादशी का मतलब पुराणों के अनुसार पाप को नष्ट करने वाला होता है। एक कथा के अनुसार इस दिन का महत्व स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा था।

Papmochani ekadashi: इस दिन व्रत रखने से अनजाने में हुए पापों से मिलती है मुक्ति

पापमोचनी एकादशी के दिन इस विधि से रखें व्रत

1. पापमोचनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा की जाती है।

2. व्रत दशमी तिथि से शुरु हो जाता है। उस दिन एक बार सात्विक भोजन करे और मन से भोग विलास की भावना को निकालकर भगवान श्री विष्णु की प्रार्थना करें।

3. एकादशी के दिन प्रातः काल स्नान करके व्रत का संकल्प करें। संकल्प के उपरान्त षोड्षोपचार सहित विष्णु जी की पूजा करें।

4. पूजा के बाद भगवान के सामने बैठकर व्रत की कथा का पाठ करें और सुनें।

5. एकादशी के दिन जागरण करने से कई गुणा पुण्य मिलता है, इसलिए रात को जागरण कर भजन कीर्तन करें।

6. द्वादशी के दिन प्रात: स्नान करके विष्णु भगवान की पूजा करें फिर ब्रह्मणों को भोजन करवाकर दक्षिणा सहित विदा करें और व्रत खोल लें।

एकादशी व्रत पूजा के बाद करें ये आरती

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता ।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।।
तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी ।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ।।

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।।

पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है,
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ।।
नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ।।

विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी,
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ।।

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली,
नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ।।
शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी,
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी।।

योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी ।।

कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए।।
अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला।।

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी ।।

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती पार करो नैया ।।
परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी ।।

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै।।