बगलामुखी देवी के साधकों को होती है मोक्ष प्राप्ति,शत्रुओं का करती हैं नाश

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मां बगलामुखी देवी के दस महाविद्या का स्वरूप मानी जाती हैं। बगलामुखी का रूप पीली आभा से युक्त है कहा जाता है की माता के इस स्वरूप की पूजा में सभी पीली वस्तुओं का विशेष रूप से प्रयोग होता है। पुराणों के अनुसार मां के इस इस स्वरूप का अवतार भगवान विष्णु की तपस्या के कारण हुआ था। एक बार सौराष्ट्र में महातूफान प्रकट हुआ था जिसे शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने देवी की तपस्या की थी और इसी तपस्या के फलस्वरूप मां बगलामुखी प्रकट हुई थीं। इन्हें स्तंभन शक्ति की देवी माना जाता है। शत्रु और विरोधियों को शांत करने के लिये तथा मुकदमे में विजय पाने के लिये मां बगलामुखी की उपासना की जाती है।

बगलामुखी देवी के साधकों को होती है मोक्ष प्राप्ति,शत्रुओं का करती हैं नाश

ऐसा है मां बगलामुखी का स्वरूप

देवी बगलामुखी, समुद्र के मध्य में स्थित मणिमय द्वीप में अमूल्य रत्नों से सुसज्जित सिंहासन पर विराजमान हैं। देवी त्रिनेत्रा हैं, मस्तक पर अर्ध चन्द्र धारण करती है, पीले शारीरिक वर्ण युक्त है, देवी ने पीला वस्त्र तथा पीले फूलों की माला धारण की हुई है। देवी के अन्य आभूषण भी पीले रंग के ही हैं तथा अमूल्य रत्नों से जड़ित हैं। देवी, विशेषकर चंपा फूल, हल्दी की गांठ इत्यादि पीले रंग से सम्बंधित तत्वों की माला धारण करती हैं।

शत्रुओं की जीभ पकड़कर रखती हैं मां बगलामुखी

देवी अपने बाएं हाथ से शत्रुओं या दैत्यों की जीभ को पकड़ कर खींचे हुए हैं। वहीं उनके दाएं हाथ में गदा उठाए हुए है। देवी के इस प्रकार जीभ पकड़ने का तात्पर्य है की देवी वाक् शक्ति देने और लेने के लिए पूजी जाती हैं। वे चाहें तो शत्रु की जिव्हा ले सकती हैं और भक्तों की वाणी को दिव्यता का आशीष दे सकती हैं। देवी वचन या बोल-चाल से गलतियों तथा अशुद्धियों को निकाल कर सही करती हैं। कई स्थानों में देवी ने मृत शरीर या शव को अपना आसन बना रखा हैं तथा शव पर ही आरूढ़ हैं तथा दैत्य या शत्रु की जीभ को पकड़ रखा हैं।

मां बगलामुखी तामसी गुण से सम्बंधित है, आकर्षण, मारण तथा स्तंभन कर्म तामसी प्रवृति से सम्बंधित हैं क्योंकि इस तरह के कार्य दूसरों को हानि पहुंचाने हेतु ही किए जाते हैं। सबसे पहले देवी मां की आराधना ब्रह्मा जी द्वारा की गई थी, इसके बाद उन्होंने बगला साधना का उपदेश सनकादिक मुनियों को दिया, इसके बाद देवर्षि नारद ने भी देवी बगलामुखी की साधना की। देवी के दूसरे उपासक स्वयं भगवान विष्णु हुए और तीसरे भगवान परशुराम। शांति कर्म में, धन-धान्य के लिए, पौष्टिक कर्म में, वाद-विवाद में विजय प्राप्त करने हेतु तथा शत्रु नाश के लिए देवी उपासना व देवी की शक्तियों का प्रयोग किया जाता हैं। देवी का साधक को भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है।