बेलपत्र की जगह इस 5 पत्तों से करें, इस श्रावण भगवान शिव की पूजा,सारी मनोकामनाएं होंगी पूरी

बेलपत्र की जगह इस 5 पत्तों से करें भगवान शिव की पूजा, होंगी सारी मनोकामनाएं पूरी

बेलपत्र की जगह इस 5 पत्तों से करें भगवान शिव की पूजा, होंगी सारी मनोकामनाएं पूरी लाइव हिंदी खबर :-अक्सर जब भगवान शिव की पूजा की बात होती है तो दूध और चावल के साथ सबसे पहले जिस चीज का नाम लिया जाता है वह है बेल पत्र। शिव पुराण में भी इस बात का जिक्र है कि भगवान शिव को बेलपत्र बहुत पसंद हैं। भोले का हर भक्त उन्हें खुश करने के लिए बेल पत्र चढ़ाता है। मगर शायद कुछ लोग ही जानते हैं कि भगवान शिव को बेलपत्र के साथ दूसरे पत्ते भी प्रिय होते हैं। अगर आपको पूजा करते समय बेल पत्र ना भी मिलें तोभी आप इन दूसरे पत्तों से भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। आप भी जानिए कौन से हैं वो पत्ते।

1. भांग

भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय है भांग। तो अगर आप चाहें तो भगवान भोले को भांग के पत्ते भी अर्पित कर सकते हैं। भांग का पत्ता या भांग का शरबत बनाकर आप भगवान भोले को चढ़ा सकते हैं इससे शिव बडे़ प्रसन्न होते हैं। भांग एक तरह की औषधि है। कहते हैं जब शिव जी ने विष का पान किया था तब जहर का उपचार करने के लिए भांग के पत्तो का इस्तेमाल किया गया था। बस तभी से ये पत्ते शिव जी के प्रिय हो गए।

2. धतूरा

धतूरे का फल और पत्ता भी औषधि गुणों वाला होता है। शिव पुराण में बताया गया है कि शिव को धतूरा भी काफी पसंद है। आप भी अपनी पूजा में धतूरे को शामिल करना बिल्कुल ना भूलें। इस शिवरात्री पर आप बेल की पत्तों के जगह धतूरे के पत्तों को भी शिव को अर्पित कर सकते हैं।

3. आक

आक का फूल और पत्ता दोनों ही शिव को चढ़ाया जाता है। यह भी शिव को काफी प्रिय होते हैं। कहा यह भी जाता है कि भगवान शिव को आक चढ़ाने वाले मानसिक और शारीरिक सभी तरह के कष्ट से दूर रहते हैं। तो बस आप भी इस श्रावण शिव को आक के पत्ते और फूल समर्पित कर सकते हैं।

4. पीपल का पत्ता

पुराणों में पीपल के पत्ते का खासा महत्व होता है। कहा यह भी जाता है कि इस पत्ते में त्रीदेव का वास होता है। साथ ही पीपल के पत्ते पर शिव स्वंय विराजमान होते हैं। इसलिए आप अपनी शिव पूजा में पीपल को भी शामिल कर सकते हैं।

5. दूर्वा

दूर्वा यानी घास के बारे में भी वेदों में बताया गया है कि इनमें अमृत का वास होता है। भगवान शिव और उनके पुत्र गणेश दोनों को ही दूर्वा बेहद पसंद होता है। तो इस श्रावण आप भी बेलपत्र की जगह दूर्वा घास को समर्पित कर सकते हैं।

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