‘वर्ल्ड कप’ में इस क्रिकेटर ने दिखाया था जलवा, अब पेट पालने के लिए भैंस-बकरियां चराने को मजबूर

15


वैसे तो आपको पता ही होगा की जो खिलाड़ी एक बार भी भारतीय टीम का हिस्सा बन जाता है उसी लाइफस्टाइल ही बदल जाती है। लेकिन ब्लाइंड क्रिकेट में अपने खेल से जलवा दिखा चुके एक क्रिकेटर को आज पेट पालने के लिए भैंस और बकरियां चरना पड़ रहा है।

जी हाँ, हम बात कर रहे है भालाजी डामोर का, अपने इस क्रिकेटर का नाम शायद ही सुना होगा लेकिन इन्होंने 1998 के ब्लाइंड वर्ल्ड कप में भारत के तरफ से शानदार प्रदर्शन किया था। इंटरनेशनल लेवल पर भारतीय टीम के लिए क्रिकेट खेल चुके हैं लेकिन उनकी जिंदगी कोहली, सहवाग, धोनी जैसे क्रिकेटर्स की तरह नहीं है।

भालाजी डामोर ने साल 1998 के ब्लाइंड क्रिकेट विश्व कप में भारतीय टीम को अपने दम पर सेमीफाइनल तक पहुंचाया था. अब वही भालाजी डामोर भैंस-बकरियां चराने का काम करते हैं। साथ ही गुजर-बसर करने के लिए वह छोटे-मोटे काम किया करते हैं। भालाजी का करियर रिकॉर्ड काफी शानदार रहा और उन्होंने कुल 125 मैचों में 3125 रन बनाए और 150 विकेट लिए।

वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करने वाले भालाजी डोमोर को पूर्व राष्ट्रपति के. आर नारायणन से अवॉर्ड भी मिला था, हालांकि भालाजी डोमोर को कोई नौकरी नहीं मिली, जिसकी उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी।

वर्तमान में भालाजी डामोर अपने पिपराणा गांव में एक एकड़ के खेत में भी काम करते हैं, हालाँकि जमीन से उतनी भी आमदनी नहीं होती कि परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी हो सके। पत्नी अनु भी गांव के दूसरे लोगों के खेतों में काम करती हैं. भालाजी का 4 साल का बेटा भी है जिसका नाम सतीश है जिसकी आंखें सामान्य हैं।

परिवार के पास रहने के नाम पर एक कमरे का टूटा-फूटा घर है. इस घर में भालाजी को क्रिकेटर के तौर पर मिले सर्टिफिकेट और अन्य पुरस्कार बड़े सलीके से संभाल कर रखे हुए हैं।