शनिदेव का ऐसा रंग-रूप बुरे कर्मों की देता है भयानक सजा, जानें बचने के सरल उपाय

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शनिदेव को सूर्य पुत्र कहा जाता है और उन्हें न्याय के देवता भी बोलते हैं। क्योंकि सभी ग्रहों में शनिदेव ही ऐसे देवता है जो व्यक्ति को उनके अच्छे और बुरे कर्मों की सजा देते हैं। शनिदेव की ढैय्या और साढ़ेसाती लगने पर व्यक्ति बहुत परेशान हो जाता है लेकिन ये ढैय्या और साढ़ेसाती उन्हीं के लिए बुरी होती है जिनके कर्म बुरे होते हैं वहीं जिन लोगों के कर्म अच्छे होते हैं उनके लिए शनि की दशा बहुत ही लाभकारी सिद्ध होती है। शनि की दशा में आपको अपार धन, सुख-संपदा प्राप्त होती है। शनि स्तुति में शनि का ऐसा अद्वितीय स्वरूप बताया गया है, जो बुराईयों और दुष्ट प्रवृत्तियों पर कहर बनकर टूटता है। आइए जानते हैं शनि का कौन सा रूप कष्टकारी होता है…

शनिदेव का ऐसा रंग-रूप बुरे कर्मों की देता है भयानक सजा, जानें बचने के सरल उपाय

शनिदेव का रंग नीला है
उनकी दाढ़ी, मूंछ और जटा बढ़ी हुई और शरीर मांसहीन यानी कंकाल जैसा है। शनिदेव की बड़ी-बड़ी गहरी और धंसी हुई आंखे हैं। पेट का आकार भयानक है, जो घोर तप से पेट पीठ से सटा हुआ है। उनका शरीर लंबा-चौड़ा है लेकिन बहुत रूखा है। शनि देव की दाढ़ें काल का साक्षात रूप मानी जाती हैं। शनिदेव की चाल धीरे-धीरे चलने वाली हैं।

अशुभ शनिदेव की निशानी
यदि जातक की कुंडली में शनि अशुभ है तो इसके अशुभ प्रभावों को आप ऐसे पहचान सकते हैं। अशुभता के कारण मकान या मकान का हिस्सा गिर जाता है या क्षतिग्रस्त हो जाता है। कर्ज या लड़ाई-झगड़े के कारण मकान बिक जाता है। अंगों के बाल तेजी से झड़ जाते हैं। अचानक घर या दुकान में आग लग सकती है। धन, संपत्ति का किसी भी तरह से नाश होता है। समय पूर्व दांत और आंख की कमजोरी। शनि के अशुभता की निशानी होती है।

शनिदेव के शुभता की निशानी
जब जातक की कुंडली में शनि की स्थिति शुभ होती है तो व्यक्ति हर क्षेत्र में प्रगति करता है। वहीं शनि के शुभ होने पर व्यक्ति के जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होता। शुभ शनि होने पर व्यक्ति के बाल और नाखून मजबूत होते हैं। ऐसा व्यक्ति न्यायप्रिय होता है उसका समाज में खूब मान-सम्मान बढ़ता है। मकान और दलाली के कार्यों में सफलता मिलती है। व्यक्ति भूमि का मालिक होता है और धन संपन्न रहता है। यदि व्यक्ति लोहे से संबंधित कोई कार्य कर रहा है तो उसमें उसे अपार धन मिलता है।

शनिदेव के उपाय
1. सर्वप्रथम शनि ग्रह के स्वामी भगवान भैरव से माफी मांगते हुए उनकी उपासना करें।
2. हनुमान ही शनि के दंश से बचा सकते हैं तो प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ें।
3. शनि की शांति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप भी कर सकते हैं।
4. तिल, उड़द, भैंस, लोहा, तेल, काला वस्त्र, काली गौ और जूता दान देना चाहिए।
5. कौवे को प्रतिदिन रोटी खिलाएं।
6. छायादान करें अर्थात कटोरी में थोड़ा-सा सरसों का तेल लेकर अपना चेहरा देखकर शनि मंदिर में अपने पापों की क्षमा मांगते हुए रख आएं।
7. दांत, नाक और कान सदा साफ रखें।
8. अंधे, अपंगों, सेवकों और सफाइकर्मियों से अच्छा व्यवहार रखें।
9. शराब पीना, जुआ खेलना, ब्याज का धंधा तुरंत बंद कर दें।
10. किसी भी देवी, देवता, गुरु आदि का अपमान न करें।