लाइव हिंदी खबर :- अमेरिका पर एक बार फिर दुनिया के अलग–अलग देशों में दखल देने के आरोप तेज हो गए हैं। म्यांमार से लेकर वेनेजुएला तक, वॉशिंगटन की नीतियों में सैन्य शक्ति, आर्थिक दबाव और राजनीतिक हस्तक्षेप साफ तौर पर देखे जा रहे हैं। कई विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों के लिए अलग–अलग देशों की आंतरिक राजनीति में सीधा या परोक्ष हस्तक्षेप करता रहा है।

म्यांमार में सैन्य शासन के खिलाफ अमेरिका लगातार कड़े बयान दे रहा है और प्रतिबंध लगा रहा है। इसके साथ ही वहां की सेना और सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं। दूसरी ओर वेनेजुएला में अमेरिका खुले तौर पर मौजूदा राष्ट्रपति के विरोध में खड़ा रहा है। वहां विपक्षी नेताओं को समर्थन देने, आर्थिक प्रतिबंध लगाने और तेल व्यापार पर सख्ती करने जैसे कदम उठाए गए हैं।
इसके अलावा मध्य-पूर्व और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ाई है। कई देशों के तटों के पास वॉरशिप तैनात किए गए हैं, जिसे सुरक्षा के नाम पर सही ठहराया जाता है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इसका मकसद सत्ता पर दबाव बनाना है। हाल के वर्षों में अमेरिका ने कुछ देशों पर 50% तक टैरिफ भी लगाए हैं, जिससे उनकी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है।
अमेरिकी नीति पर सवाल उठाते हुए कई देश यह कह रहे हैं कि यह वैश्विक शांति और संप्रभुता के खिलाफ है। उनका मानना है कि किसी भी देश की सरकार बदलने या नीतियों को प्रभावित करने का अधिकार बाहरी ताकतों को नहीं होना चाहिए।
हालांकि अमेरिका खुद को लोकतंत्र और मानवाधिकारों का समर्थक बताता है, लेकिन बार-बार होने वाले ऐसे हस्तक्षेप उसकी नीयत पर सवाल खड़े कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या अमेरिका वास्तव में वैश्विक स्थिरता चाहता है या अपने हितों के लिए दुनिया भर में दबाव की राजनीति कर रहा है।