यहां बाढ़ पीड़ित किसान ने आर्थिक तंगी के चलते की आत्महत्या

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लाइव हिंदी खबर:- ग्राम पंचायत में नौकरी थी लेकिन वेतन समाप्त हो गया था। पिता के पास खेत है, पहले सूखा था और अब लगातार बारिश हो रही है इसलिए फसलें बर्बाद हो गई हैं। नंदुर पठार (ताल। परनेर) के राजू बबन आग्रे (36) ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

घटना से कुछ समय पहले परनेर तहसीलदार ज्योति देवरे ने बारिश से क्षतिग्रस्त क्षेत्र का निरीक्षण करने के लिए गाँव का दौरा किया था। ग्रामीणों के बीच अब चर्चा है कि अगर उन्होंने उनसे बातचीत की होती तो वह बच सकते थे।

राजू आगरा की ग्राम पंचायत में चपरासी के रूप में कार्यरत था। कोरोना संक्रमण के कारण ग्राम पंचायत की वित्तीय स्थिति खराब हो गई है। नतीजतन आगरा को कुछ समय के लिए वेतन नहीं मिला है। उनके पिता के पास एक खेत है।

इससे पहले हालांकि लगातार सूखे के कारण कृषि में अधिक उत्पादन नहीं हुआ। नौकरी ही उनके लिए आधार थी। वेतन बंद होने के कारण वह कृषि पर निर्भर था। वर्तमान में फसल भी ले ली गई।

हालांकि लगातार बारिश ने कृषि को भी नुकसान पहुंचाया। ग्रामीणों ने कहा कि आगरा में न तो नौकरी का दोहरा संकट था और न ही कृषि आय की गारंटी।

बारिश से हुए नुकसान का निरीक्षण करने के लिए आज सुबह परनेर तहसीलदार ज्योति देवर उसी गांव में गए थे। उनके जाने के बाद आगरा में आत्महत्या की सूचना मिली। आगरा को भी कर्ज में डूबा बताया गया।

बारिश से हुए नुकसान के बावजूद मंत्री और अधिकारी वर्तमान में गांवों का निरीक्षण कर रहे हैं और पंचनामा बना रहे हैं। हालांकि ग्रामीण सोच रहे हैं कि आगरा ने व्यवस्था पर अपना दुख व्यक्त करने के बजाय अपने जीवन को समाप्त करने का रास्ता क्यों अपनाया।
घटना की जानकारी होने पर परनेर पुलिस ने गांव में जाकर शव को कब्जे में ले लिया। सरकारी अस्पताल में शव परीक्षण के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। शाम को शोक भरे माहौल में राजू का अंतिम संस्कार किया गया।

अगर राजू ने अपनी ग्राम पंचायत में वेतन बकाया का मुद्दा और गाँव में आने वाले तहसीलदारों के साथ कृषि घाटे की समस्या को उठाया होता, तो गाँव में कम से कम राहत और चर्चा होती।