18 साल बाद शहीद की पत्नी को मिली आर्थिक मदद, देरी पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने मांगी माफी

लाइव हिंदी खबर:- देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले सैनिकों के परिवारों को अपने अधिकारों के लिए वर्षों तक सरकार के पास जाना पड़ा। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के दौरान आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए रमेश कुमार की पत्नी को चुनाव आयोग से अपना बकाया पाने के लिए 18 साल तक इंतजार करना पड़ा।

45वीं बटालियन के एक जवान रमेश कुमार को 2002 में जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए तैनात किया गया था। वह 8 अक्टूबर 2002 को डोडा टाउन हॉल इलाके में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए थे।

रमेश कुमार की पत्नी प्रमिला देवी हरियाणा के भिवानी की रहने वाली थीं। उसने चुनाव आयोग को अपने पति की संग्रा राशि जल्द से जल्द दिलाने के लिए लिखा था।

उनके अनुरोध को जम्मू और कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को अवगत कराया गया। हालांकि अगली प्रक्रिया पूरी होने के लिए वर्ष 2020 का समय समाप्त हो गया। इस बीच निर्मला देवी को लगातार सरकारी मदद लेनी पड़ी।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने देरी के लिए माफी मांगी

2002 में रमेश कुमार की पत्नी को 5 लाख रुपये का संस्कार देना पड़ा। देरी के कारण चुनाव आयोग ने प्रमिला देवी को 20 लाख रुपये का भुगतान किया और उसे उसके बैंक खाते में भेज दिया।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने देरी के लिए प्रमिला देवी से लिखित माफी मांगी है और भविष्य में ऐसे मामलों में देरी न करने के लिए सभी राज्य चुनाव अधिकारियों को पत्र भेजा है।