लाइव हिंदी खबर :- रोहिणी कोर्ट ने 16 साल बाद 2009 के पनीपत एमबीए छात्रा शाहीन मलिक पर हुए एसिड अटैक मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। यह मामला 2013 में दिल्ली में स्थानांतरित किया गया था और इसमें आरोप लगाया गया था कि हमला हैरसमेंट और साजिश के तहत किया गया।

पीड़िता शाहीन मलिक ने कहा कि जब इतनी गंभीर अन्याय होती है तो कोई कैसे संतुष्ट हो सकता है? यह कोई सामान्य मामला नहीं है, जैसे किसी को थप्पड़ मारना। यह एसिड अटैक का मामला है, जिसे न्यायाधीश ने भी गंभीर बताया था। फिर भी ऐसा लगा कि हर संभव कोशिश की जा रही थी कि आरोपियों को बरी कर दिया जाए।
पीड़िता की वकील मदीना शहजाद ने कहा कि हमने ऐसे तर्क प्रस्तुत किए थे कि हमें पूरा भरोसा था कि दोषी पाए जाएंगे। लेकिन जैसे-जैसे न्यायालय का आदेश पढ़ा गया, हमारी उम्मीदें घटती गईं। अंत में हमें पता चला कि सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता और उनके परिवार ने लगातार न्याय की गुहार लगाई, लेकिन अदालत का फैसला उनके लिए निराशाजनक रहा। इस फैसले के बाद पीड़िता ने न्यायपालिका और कानूनी प्रणाली पर सवाल उठाए हैं, जबकि सामाजिक संगठनों ने इस निर्णय की कड़ी निंदा की। यह मामला एसिड अटैक जैसी गंभीर घटनाओं में न्याय प्रणाली की चुनौतियों और पीड़ितों को मिलने वाली सुरक्षा पर बहस को फिर से उजागर करता है।