लाइव हिंदी खबर :- चीन के तियानमेन स्क्वायर आंदोलन से जुड़ा एक चौंकाने वाला वीडियो 35 साल बाद सामने आया है। इस वीडियो में एक चीनी सैन्य अधिकारी यह बताते हुए नजर आ रहा है कि 1989 के तियानमेन स्क्वायर प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर सीधे गोली चलाने का आदेश क्यों नहीं दिया गया था। यह वीडियो उस दौर की सैन्य रणनीति और अंदरूनी फैसलों पर नई रोशनी डालता है।

वीडियो में अधिकारी कहते हैं कि उस समय तियानमेन स्क्वायर में हजारों छात्र और आम नागरिक मौजूद थे। अगर सेना ने सीधे गोलीबारी की होती, तो करीब 10 हजार छात्रों के कुचले जाने या मारे जाने की आशंका थी। अधिकारी के मुताबिक हालात बेहद संवेदनशील थे और एक गलत कदम देश को और बड़े संकट में धकेल सकता था। इसी वजह से तत्काल गोली चलाने के बजाय दूसरे तरीकों पर विचार किया गया।
अधिकारी ने यह भी बताया कि नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि आंदोलन को कैसे रोका जाए, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव और देश के भीतर संभावित जनाक्रोश को भी ध्यान में रखना जरूरी था। तियानमेन स्क्वायर में बड़ी संख्या में निहत्थे छात्र लोकतांत्रिक सुधारों की मांग कर रहे थे, ऐसे में सेना की कार्रवाई से भारी जनहानि हो सकती थी।
यह वीडियो ऐसे समय पर सामने आया है, जब चीन में 1989 के तियानमेन आंदोलन पर सार्वजनिक चर्चा अब भी बेहद सीमित है। चीनी सरकार इस घटना से जुड़े अधिकांश रिकॉर्ड और सूचनाओं को गोपनीय मानती रही है। ऐसे में इस वीडियो का लीक होना काफी अहम माना जा रहा है।
यह फुटेज तियानमेन स्क्वायर की घटनाओं को समझने में एक नया दृष्टिकोण देता है। इससे यह साफ होता है कि उस समय लिए गए फैसले केवल सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दबावों से भी प्रभावित थे। वीडियो ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान तियानमेन स्क्वायर की दर्दनाक यादों की ओर खींच लिया है।