लाइव हिंदी खबर :- अमेरिका का शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर USS George H.W. Bush इस समय सीधे रास्ते की बजाय लंबा समुद्री मार्ग अपनाकर मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है। आमतौर पर ऐसे जहाज भूमध्य सागर और स्वेज नहर के रास्ते रेड सी से गुजरते हैं, लेकिन इस बार यह जहाज अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से केप ऑफ गुड होप से होकर जा रहा है। यह बदलाव दिखाता है कि मौजूदा हालात में सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है और जोखिम वाले रास्तों से बचा जा रहा है।

यमन के हूती विद्रोहियों ने पिछले कुछ समय में रेड सी क्षेत्र को असुरक्षित बना दिया है। उन्होंने कई बार ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए जहाजों को निशाना बनाया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग प्रभावित हुआ है। इन्हीं खतरों के कारण अमेरिका ने अपने सबसे बड़े और अहम युद्धपोत को भी सुरक्षित रास्ते से भेजने का फैसला लिया है।
रेड सी और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और अन्य सामान का परिवहन होता है। लेकिन लगातार हमलों और बढ़ते तनाव के कारण अब यह इलाका जहाजों के लिए जोखिम भरा बन चुका है, जिससे कई देशों को अपने रास्ते बदलने पड़ रहे हैं।
USS George H.W. Bush एक निमिट्ज क्लास का परमाणु ऊर्जा से चलने वाला सुपरकैरियर है। यह जहाज हजारों नाविकों और कई लड़ाकू विमानों के साथ किसी भी सैन्य अभियान में बड़ी भूमिका निभा सकता है। इसके साथ कई डेस्ट्रॉयर और अन्य सपोर्ट जहाज भी चलते हैं, जो इसकी ताकत और सुरक्षा को और बढ़ाते हैं।
अमेरिका इस समय मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी को मजबूत कर रहा है। यह कैरियर वहां पहले से मौजूद अन्य युद्धपोतों के साथ मिलकर काम करेगा। बढ़ती सैन्य गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है और आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं।