लाइव हिंदी खबर :- ईरान के साथ जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच अमेरिका में रक्षा तंत्र के अंदर तेजी से बड़े फैसले लिए जा रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पहले आर्मी चीफ को हटाया और अब नौसेना प्रमुख को भी पद से बर्खास्त कर दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब फारस की खाड़ी में अमेरिकी सेना पूरी तरह सक्रिय है और हर स्तर पर रणनीतिक फैसले लिए जा रहे हैं। इन बदलावों से साफ संकेत मिलता है कि सरकार सेना के शीर्ष नेतृत्व में नई दिशा और नई टीम बनाना चाहती है।

नौसेना प्रमुख जॉन फेलन को हटाने की आधिकारिक वजह स्पष्ट नहीं की गई लेकिन अंदरूनी सूत्रों के अनुसार उनके और रक्षा मंत्री के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे थे। खासतौर पर जहाज निर्माण परियोजनाओं, काम की गति और नेतृत्व शैली को लेकर दोनों के बीच टकराव बढ़ गया था। अमेरिका अपनी नौसेना को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर नए युद्धपोत और पनडुब्बियां बनाना चाहता है लेकिन इन योजनाओं में देरी और बढ़ती लागत चिंता का कारण बन रही थी। माना जा रहा है कि इन्हीं मुद्दों के चलते फेलन को पद से हटाया गया।
अमेरिकी सेना में एक तय प्रक्रिया होती है जिसे कमांड चेन कहा जाता है। इसके तहत सभी फैसले और जानकारी एक निश्चित क्रम में ऊपर तक पहुंचती है। लेकिन आरोप है कि जॉन फेलन ने इस व्यवस्था को नजरअंदाज करते हुए सीधे राष्ट्रपति से संपर्क किया। इस कदम को अनुशासन के खिलाफ माना गया और इससे रक्षा मंत्रालय के भीतर असंतोष बढ़ गया। यही वजह रही कि उनके खिलाफ कार्रवाई तेज हुई और अंततः उन्हें पद से हटा दिया गया।
इससे पहले आर्मी चीफ रैंडी जॉर्ज को भी समय से पहले हटा दिया गया था। उनका कार्यकाल अभी बाकी था लेकिन उन्हें अचानक पद छोड़ना पड़ा। यह बदलाव केवल व्यक्तिगत कारणों से नहीं बल्कि व्यापक रणनीतिक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। नई सरकार अक्सर अपने भरोसेमंद लोगों को अहम पदों पर लाना चाहती है ताकि नीतियों को तेजी से लागू किया जा सके। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी सेना के शीर्ष स्तर पर एक नई टीम तैयार की जा रही है।
सिर्फ सेना ही नहीं बल्कि परमाणु विभाग में भी सख्त कार्रवाई की गई है। एक वरिष्ठ वैज्ञानिक को संवेदनशील जानकारी लीक करने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया। बताया जा रहा है कि वह हनी ट्रैप में फंस गया था, जिसके कारण सुरक्षा से जुड़ी जानकारी बाहर चली गई। यह मामला बेहद गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता था। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने और सतर्कता बढ़ा दी है।