ग्लोबल तनाव का असर, शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

लाइव हिंदी खबर :- शुक्रवार 24 अप्रैल को शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 900 अंक गिरकर 76800 के आसपास कारोबार करता नजर आया वहीं निफ्टी भी लगभग 250 अंक नीचे आकर 23930 के स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से बाजार लगातार दबाव में बना हुआ है। कारोबार की शुरुआत से ही बिकवाली का माहौल रहा जिससे बाजार संभल नहीं पाया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला है। दोनों देशों के बीच हालात पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं जिससे निवेशकों में डर बना हुआ है।

ग्लोबल तनाव का असर, शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

समुद्री रास्तों और तेल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसका असर पूरी दुनिया के बाजारों पर पड़ रहा है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अस्थिरता बढ़ती है तो निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं और शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ जाती है। आज के कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी और फार्मा सेक्टर पर देखने को मिला। आईटी इंडेक्स में बड़ी गिरावट आई, जिससे इस सेक्टर की प्रमुख कंपनियों के शेयर नीचे आ गए। खासतौर पर इंफोसिस के शेयर में 4% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई जिससे बाजार पर और दबाव बढ़ा। हालांकि कंपनी के नतीजे अच्छे रहे लेकिन निवेशकों ने मुनाफावसूली करना ज्यादा बेहतर समझा। इसी तरह फार्मा सेक्टर में भी गिरावट ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ा दिया।

शेयर बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी रही। हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों ने बड़ी मात्रा में शेयर बेचे हैं जिससे बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा है। जब विदेशी निवेशक बाजार से पैसा निकालते हैं तो इसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर पड़ता है। हालांकि घरेलू निवेशकों ने कुछ हद तक खरीदारी की लेकिन वह बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी बाजार की गिरावट की एक अहम वजह बनी है। ब्रेंट क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है। तेल की कीमतें बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ती है जिसका असर उनके मुनाफे पर पड़ता है, यही कारण है कि निवेशक सतर्क हो गए हैं और बाजार में जोखिम लेने से बच रहे हैं, आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक हालात और निवेशकों के भरोसे पर निर्भर करेगी।

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