लाइव हिंदी खबर :- अमेरिका में H-1B वीजा प्रोग्राम को लेकर एक नया बिल पेश किया गया है जिसने भारतीय प्रोफेशनल्स के बीच चिंता बढ़ा दी है। इस प्रस्ताव में वीजा प्रोग्राम को अगले तीन साल के लिए रोकने की बात कही गई है। अगर यह बिल पास होता है तो इसका सीधा असर उन हजारों लोगों पर पड़ेगा जो अमेरिका में नौकरी के सपने देख रहे हैं। H-1B वीजा का सबसे ज्यादा फायदा भारतीयों को मिलता रहा है। हर साल जारी होने वाले कुल वीजा में से करीब 70 प्रतिशत भारतीयों को ही दिए जाते हैं। ऐसे में इस नए प्रस्ताव का सबसे बड़ा प्रभाव भारतीय आईटी और अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों पर पड़ेगा। इससे विदेश में करियर बनाने की योजना बना रहे युवाओं के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

इस बिल में कई सख्त बदलाव सुझाए गए हैं। वीजा की संख्या को 65000 से घटाकर 25000 करने का प्रस्ताव है जिससे मौके काफी कम हो जाएंगे। इसके अलावा न्यूनतम सैलरी 2 लाख डॉलर तय करने की बात कही गई है ताकि केवल उच्च वेतन वाले प्रोफेशनल्स को ही प्राथमिकता मिले। साथ ही वीजा धारकों के लिए अपने परिवार को अमेरिका लाने पर भी रोक लगाने का सुझाव दिया गया है। प्रस्ताव में लॉटरी सिस्टम खत्म कर वेतन आधारित चयन प्रक्रिया लागू करने की बात कही गई है। इसका मतलब यह होगा कि जिन उम्मीदवारों को ज्यादा वेतन मिलेगा उन्हें पहले मौका दिया जाएगा। इसके अलावा कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उन्हें योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिले तभी वे विदेशी कर्मचारी को नियुक्त कर सकेंगी।
साथ ही H-1B वर्कर्स को एक से ज्यादा नौकरी करने से रोकने का भी प्रावधान शामिल है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब अमेरिकी टेक और हेल्थकेयर सेक्टर में विदेशी प्रोफेशनल्स की बड़ी भूमिका है। खासकर भारतीय इंजीनियर और विशेषज्ञ इन क्षेत्रों में अहम योगदान देते हैं। अगर यह बिल लागू होता है तो कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया और वैश्विक टैलेंट के प्रवाह पर असर पड़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह प्रस्ताव कानून बनता है या नहीं और इसका वैश्विक रोजगार बाजार पर क्या प्रभाव पड़ता है।