लाइव हिंदी खबर :- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में देश के ऐतिहासिक परमाणु परीक्षण को याद किया। उन्होंने कहा कि 11 मई 1998 का दिन भारत के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण था क्योंकि इसी दिन राजस्थान के पोकरण में भारत ने सफल परमाणु परीक्षण कर दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय पूरी दुनिया की नजर भारत पर थी और कई बड़े देशों ने भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि जब भारत ने परमाणु परीक्षण किया तब कई शक्तिशाली देशों ने भारत को रोकने और दबाव में लाने की कोशिश की। भारत पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बनाया गया और कई तरह की पाबंदियां लगाने की कोशिश हुई। इसके बावजूद देश पीछे नहीं हटा। उन्होंने कहा कि भारत ने उस कठिन समय में भी साहस और आत्मविश्वास दिखाया और दुनिया को यह संदेश दिया कि देश अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत डरने वाला देश नहीं है और चुनौतीपूर्ण हालात में भी मजबूती से खड़ा रहना उसकी पहचान है।
मोदी ने कहा कि 11 मई के बाद 13 मई 1998 को भारत ने दो और परमाणु परीक्षण किए थे। इन परीक्षणों के बाद पूरी दुनिया को भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति और आत्मनिर्भरता का अंदाजा हो गया था। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं थी बल्कि भारत के आत्मसम्मान और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा फैसला था। उस समय देश ने यह साबित किया कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के मुद्दे पर किसी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर के महत्व पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सोमनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति और पुनर्निर्माण की भावना का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद इस मंदिर के पुनर्निर्माण ने देश में आत्मविश्वास और नई ऊर्जा का संचार किया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की पहचान उसकी संस्कृति, आस्था और मजबूत संकल्प से जुड़ी हुई है।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज का भारत पहले से ज्यादा मजबूत, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बन चुका है। उन्होंने कहा कि देश विज्ञान, रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। पोकरण परमाणु परीक्षण को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वह भारत के साहस और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक बन चुका है।