लाइव हिंदी खबर :- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने और सरकारी खर्च कम करने की अपील का असर अब कई राज्यों में साफ दिखाई देने लगा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में सरकारें और मुख्यमंत्री अपने स्तर पर नए फैसले ले रहे हैं। कहीं सरकारी काफिलों में गाड़ियां कम की जा रही हैं तो कहीं कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम लागू किया जा रहा है। इस पहल को ऊर्जा बचत और सरकारी खर्च में कटौती की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। त्रिपुरा सरकार ने ईंधन बचाने के लिए बड़ा फैसला लेते हुए ग्रुप C और D कर्मचारियों के लिए नई व्यवस्था लागू की है। अब केवल 50 प्रतिशत कर्मचारी ही रोज दफ्तर आएंगे जबकि बाकी कर्मचारी घर से काम करेंगे सरकार ने विभागों को साप्ताहिक ड्यूटी रोस्टर बनाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि जरूरी सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है। राज्य सरकार का मानना है कि इससे ट्रांसपोर्ट खर्च और ईंधन की खपत दोनों कम होंगी।

आंध्र प्रदेश, गोवा, राजस्थान, हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों में मुख्यमंत्रियों ने अपने काफिलों में गाड़ियों की संख्या कम कर दी है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अपने दौरे के दौरान आधी गाड़ियां इस्तेमाल करने का फैसला लिया है वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का काफिला भी पहले की तुलना में काफी छोटा नजर आया। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने तो हफ्ते में एक दिन बिना गाड़ी के रहने का फैसला भी लिया है। पंजाब में हर बुधवार अधिकारियों के लिए चार पहिया वाहन का इस्तेमाल नहीं करने का निर्णय लिया गया है। बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इलेक्ट्रिक गाड़ी से सचिवालय पहुंचे। मध्य प्रदेश में भी वीआईपी काफिलों और सरकारी दौरों को सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन फैसलों को सिर्फ प्रतीकात्मक कदम नहीं भविष्य की नई प्रशासनिक सोच के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी खुद भी हाल ही में केवल दो गाड़ियों के साथ नजर आए जबकि आमतौर पर उनके काफिले में कई वाहन शामिल रहते हैं। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि बचत की शुरुआत शीर्ष स्तर से होनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की पहल लगातार जारी रही तो इससे ईंधन की बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण और सरकारी खर्च में कमी लाने में भी मदद मिल सकती है।