लाइव हिंदी खबर :- ब्रिटेन की संसद में एक बार फिर ग्रूमिंग गैंग कांड चर्चा का विषय बन गया है। सांसद रूपर्ट लोव ने संसद में पीड़ित महिलाओं और लड़कियों की गवाही पढ़ते हुए उन भयावह घटनाओं का जिक्र किया, जिन्होंने पूरे देश को झकझोर दिया। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान सामने आई कहानियां इतनी गंभीर हैं कि उन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार यह केवल कुछ घटनाओं का मामला नहीं बल्कि कई दशकों से चल रही एक बड़ी सामाजिक और कानूनी विफलता का उदाहरण है।

संसद में पढ़ी गई गवाहियों में कई महिलाओं ने अपने साथ हुए अत्याचारों का उल्लेख किया, कुछ पीड़िताओं ने बताया कि कम उम्र में उन्हें बहला-फुसलाकर अपराधियों के जाल में फंसाया गया और बाद में धमकी, हिंसा तथा मानसिक दबाव के जरिए उनका लगातार शोषण किया गया, कई गवाहियों में यह भी कहा गया कि विरोध करने पर जान से मारने या परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकियां दी जाती थीं, इन बयानों ने संसद में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग शब्द उन संगठित गिरोहों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो बच्चों और किशोरियों का यौन शोषण करते हैं। ऐसे गिरोह पहले अपने शिकार का भरोसा जीतते हैं और फिर उन्हें मानसिक, आर्थिक या शारीरिक रूप से नियंत्रित कर उनका शोषण करते हैं। पिछले दो दशकों में ब्रिटेन के कई शहरों में ऐसे मामलों का खुलासा हुआ है जिनमें बड़ी संख्या में पीड़ित सामने आई थीं।
सांसद रूपर्ट लोव ने अपने भाषण में कहा कि कई चर्चित मामलों में आरोपी पाकिस्तान मूल के पुरुष थे, हालांकि विशेषज्ञों और जांच एजेंसियों का कहना है कि अपराध को किसी एक समुदाय या धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, कानून का उद्देश्य हर आरोपी को उसके अपराध के आधार पर सजा दिलाना है, चाहे उसकी पृष्ठभूमि कुछ भी हो।
इस मुद्दे के दोबारा सामने आने के बाद पीड़ितों के लिए न्याय और जवाबदेही की मांग तेज हो गई है, कई सामाजिक संगठनों और नेताओं का कहना है कि अतीत की गलतियों से सबक लेते हुए ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, साथ ही पीड़ितों को उचित सहायता, सुरक्षा और कानूनी समर्थन उपलब्ध कराना भी जरूरी है ताकि वे बिना डर के अपनी बात रख सकें।