लाइव हिंदी खबर :- अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर मध्य पूर्व की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। इजराइल ने साफ कर दिया है कि वह इस समझौते को मानने के लिए बाध्य नहीं है। इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने कहा कि उनका देश पूरी तरह स्वतंत्र है और किसी भी विदेशी समझौते का पालन करना उसकी मजबूरी नहीं है। उन्होंने कहा कि इजराइल अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेगा। इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी स्पष्ट किया है कि उनकी सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी।

उन्होंने कहा कि लेबनान, सीरिया और गाजा में बनाए गए सुरक्षा क्षेत्रों में इजराइली सैनिक आगे भी तैनात रहेंगे। उनके इस बयान से यह साफ हो गया है कि इजराइल फिलहाल अपनी सैन्य रणनीति में कोई बदलाव करने के मूड में नहीं है। इससे क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीदों को झटका लग सकता है। दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि दोनों देश 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो करीब 47 साल बाद अमेरिका और ईरान के बीच इतनी बड़ी स्तर की आधिकारिक बैठक होगी। हालांकि अभी तक समझौते के पूरे दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
ईरान ने समझौते पर अंतिम हस्ताक्षर से पहले तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी के अनुसार अमेरिका को सबसे पहले ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करनी होगी सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोकना होगा और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना होगा। ईरान का कहना है कि इन कदमों के बाद ही आगे की बातचीत और समझौते की प्रक्रिया सफल हो सकेगी। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है लेकिन इजराइल की नाराजगी और क्षेत्रीय तनाव के कारण शांति की राह अभी आसान नहीं दिख रही है। आने वाले दिनों में दुनिया की नजरें इस संभावित समझौते और उससे जुड़ी राजनीतिक गतिविधियों पर बनी रहेंगी।