लाइव हिंदी खबर :- साइबर अपराधी अब लोगों को ठगने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा ले रहे हैं। हाल ही में सामने आए ‘फेस-वॉइस क्लोनिंग’ स्कैम में ठग भीड़भाड़ वाली जगहों जैसे मॉल, मेट्रो स्टेशन और बाजार में लोगों से मोबाइल चलाने या किसी ऐप से जुड़ी मदद मांगते हैं। इस दौरान उनके फोन का कैमरा और माइक्रोफोन पहले से रिकॉर्डिंग मोड में होता है। जैसे ही कोई व्यक्ति मदद करता है, कुछ ही सेकेंड में उसका चेहरा और आवाज रिकॉर्ड कर ली जाती है।

रिकॉर्ड किए गए वीडियो और आवाज की मदद से साइबर ठग AI तकनीक का इस्तेमाल कर व्यक्ति का डिजिटल क्लोन तैयार कर लेते हैं। इसके बाद नकली वीडियो, ऑडियो या फर्जी पहचान बनाकर लोगों के रिश्तेदारों, दोस्तों या परिचितों से पैसों की मांग की जा सकती है। सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से साझा की गई फोटो और वीडियो का भी गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए ऑनलाइन साझा की जाने वाली जानकारी को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
जो लोग सोशल मीडिया पर अपनी निजी तस्वीरें और वीडियो अधिक साझा करते हैं, जिनकी प्रोफाइल सार्वजनिक रहती है या जो तकनीक के बारे में कम जानकारी रखते हैं वे इस तरह के साइबर अपराधियों के आसान निशाने बन सकते हैं। भीड़भाड़ वाली जगहों पर अनजान लोगों की मदद करते समय भी सतर्क रहना बेहद जरूरी है। इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए अनजान व्यक्ति का मोबाइल अपने हाथ में लेने से बचें। सोशल मीडिया प्रोफाइल को प्राइवेट रखें और जरूरत से ज्यादा निजी जानकारी साझा न करें।
किसी भी संदिग्ध वीडियो कॉल, ऑडियो या पैसों की मांग पर तुरंत भरोसा न करें। परिवार के साथ पहले से एक सीक्रेट कोड या पहचान तय रखें। फोन या वीडियो के जरिए पैसे मांगने पर संबंधित व्यक्ति से सीधे संपर्क करके पुष्टि करें। मजबूत पासवर्ड और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें। अपने मोबाइल और ऐप्स को नियमित रूप से अपडेट रखें। साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी समय-समय पर प्राप्त करें। यदि किसी तरह की ठगी का संदेह हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें या आधिकारिक साइबर पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज कराएं।