लाइव हिंदी खबर :- रोजमर्रा की जिंदगी में छोटी या बड़ी चोट लगना आम बात है लेकिन कई लोग घाव की सफाई तो कर लेते हैं, पर टिटनेस से बचाव पर ध्यान नहीं देते। टिटनेस एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है जो शरीर के नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है। यह संक्रमण मिट्टी, धूल, गंदगी या जानवरों के मल में मौजूद बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बैक्टीरिया किसी भी कट, खरोंच, गहरे घाव या जलने की चोट के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकता है। यह केवल जंग लगे लोहे से ही नहीं होता बल्कि किसी भी दूषित घाव से होने का खतरा रहता है।

टिटनेस के लक्षण आमतौर पर चोट लगने के कुछ दिनों बाद दिखाई देते हैं। शुरुआत में जबड़े और गर्दन में जकड़न, मुंह खोलने में परेशानी, निगलने में कठिनाई और मांसपेशियों में दर्द या ऐंठन महसूस हो सकती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है और मरीज की जान के लिए भी खतरा बन सकता है। यदि किसी भी कारण से चोट लग जाए तो सबसे पहले घाव को साफ पानी और साबुन से अच्छी तरह धोकर साफ रखें। घाव पर साफ पट्टी बांधें और यदि घाव गहरा, गंदा या किसी नुकीली चीज से हुआ है तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉक्टर आपकी चोट और पहले लगे टीकों की जानकारी के आधार पर टिटनेस का टीका या अन्य जरूरी इलाज की सलाह देंगे। आमतौर पर चोट लगने के 24 से 48 घंटे के भीतर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर माना जाता है। टिटनेस से बचने का सबसे प्रभावी तरीका समय पर टीकाकरण है। बच्चों को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार सभी टीके समय पर लगवाने चाहिए।
गर्भवती महिलाओं के लिए भी टिटनेस का टीका बेहद जरूरी होता है जिससे मां और नवजात दोनों सुरक्षित रहते हैं। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से टिटनेस का बूस्टर नहीं लगा है और उसे गंभीर चोट लग जाती है तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेकर टीका लगवाना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी और समय पर इलाज टिटनेस जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है।