लाइव हिंदी खबर :- ईरान और इजराइल के बीच बढ़े तनाव का असर पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर देखने को मिला। युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और कुछ ही महीनों में इसके दाम लगभग 23 प्रतिशत तक बढ़ गए। तेल महंगा होने का सीधा असर पेट्रोल, डीजल, परिवहन और रोजमर्रा की कई जरूरी चीजों की कीमतों पर पड़ा। इससे कई देशों में महंगाई बढ़ने की चिंता भी गहरा गई।

छह बड़ी तेल कंपनियों को हुआ भारी फायदा
तेल की बढ़ी कीमतों का सबसे ज्यादा लाभ दुनिया की बड़ी तेल कंपनियों को मिला। रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल से जून के बीच छह प्रमुख तेल कंपनियों ने करीब 81 अरब डॉलर का मुनाफा कमाया भारतीय मुद्रा में यह राशि लगभग 7 लाख करोड़ रुपये के बराबर है जो भारत के वार्षिक रक्षा बजट से भी अधिक बताई जा रही है। इससे यह साफ होता है कि वैश्विक संकट के समय ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी कंपनियों को कितना बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट पर समझौते की उम्मीद
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान, ओमान और अमेरिका के बीच बातचीत जारी है। खबरें हैं कि जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए नए नियमों पर चर्चा हो रही है यदि यह समझौता सफल होता है तो तेल की आपूर्ति सामान्य रह सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इसी उम्मीद के बीच हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ गिरावट भी दर्ज की गई।
क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहा है
मिडिल ईस्ट में तनाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यमन के हूती विद्रोहियों के हमले, ईरान की आंतरिक राजनीतिक हलचल और अमेरिका की सैन्य गतिविधियां हालात को और संवेदनशील बना रही हैं। ऐसे माहौल में वैश्विक बाजार लगातार घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं आने वाले दिनों में होने वाले राजनीतिक और कूटनीतिक फैसले तय करेंगे कि तेल की कीमतें स्थिर होती हैं या फिर दुनिया को महंगाई के नए दौर का सामना करना पड़ेगा।