लाइव हिंदी खबर :- इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण का जोरदार विरोध हुआ। जैसे ही उन्होंने स्पीच देना शुरू की, करीब 50 देशों के 100 से अधिक डिप्लोमेट्स हॉल से बाहर चले गये। वॉकाआउट करने वाले देशों में फ्रांस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया आदि भी शामिल थे। जिन्होंने हाल में ही फिलीस्तीन को मान्यता दी है। अमेरिका और ब्रिटेन के प्रतिनिधि हाल में ही मौजूद रहे, लेकिन वरिष्ठ अधिकारी नहीं आए, बल्कि जूनियर राजनीतिकों ने उनकी जगह ली। इसके बावजूद नेतन्याहू ने भाषण जारी रखा।

नेतन्याहू ने कहा कि पिछले 1 साल में स्थिति बदल गई है। उन्होंने दावा किया है कि इसराइल ने अपने सभी दुश्मनों को खत्म कर दिया है। उनके अनुसार यमन में हूती, गाजा में हमास, लेबनान में हिजबुल्लाह, सीरिया में असद और ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को नष्ट कर दिया गया। सुरक्षा कारणों और इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के वारंट के चलते नेतन्याहू ने यूएन बैठक में शामिल होने के लिए विशेष रास्ता अपनाया। उन्होंने पांच यूरोपीय देशों में से बचते हुए अमेरिका पहुंचने के लिए अतिरिक्त 600 किलोमीटर यात्रा तय की।
नेतन्याहू ने ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम पर भी चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार यह केवल इसराइल को खतरे में डालने के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका और दुनिया के अन्य देशों पर दबाव बनाने का भी हथियार है। उन्होंने बताया कि पिछली बार जब यूएन में खड़े थे तब ईरान तेजी से अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को बढ़ा रहा था और उसके समर्थक हमास और हिजबुल्लाह लगातार इजरायल को निशाना बना रहे थे, लेकिन अब इसराइल ने खतरों को समाप्त कर दिया है।