लाइव हिंदी खबर :- ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III के छोटे भाई प्रिंस एंड्रयू ने शुक्रवार को ऐलान किया कि वे अब अपनी सभी रॉयल उपाधियों का उपयोग नहीं करेंगे, जिसमें ‘ड्यूक ऑफ यॉर्क’ शामिल है। यह फैसला उनके लिए लंबे समय से जारी विवाद और एप्सटीन सेक्स स्कैंडल के बीच आया है। प्रिंस एंड्रयू का नाम यौन अपराधी जेफ्री एप्सटीन के केस में सामने आया था।

इसके अलावा उनके पैसों की गड़बड़ी और एक कथित चीनी जासूस से रिश्तों को लेकर भी सवाल उठे थे। हालांकि उन्होंने अपने खिलाफ लगे आरोपों को पूरी तरह नकारा है, लेकिन शाही परिवार की छवि और सार्वजनिक विवाद को देखते हुए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। एप्सटीन केस की पीड़िता वर्जीनिया गिफ्रे की किताब जल्द प्रकाशित होने वाली है। इसमें प्रिंस एंड्रयू और एप्सटीन के बीच करीबी संबंधों का जिक्र है, जिससे उनके मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
गिफ्रे ने 2021 में प्रिंस एंड्रयू के खिलाफ मुकदमा भी दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि 17 साल की उम्र में उन्हें एप्सटीन ने प्रिंस के पास ले जाया और यौन शोषण किया। वर्जीनिया के आरोपों के बाद प्रिंस को शाही परिवार से बेदखल कर दिया गया था। यदि उन्होंने खुद उपाधियां नहीं छोड़ी होतीं, तो संसद को कानून बनाना पड़ता, जो शाही परिवार के लिए कठिन होता।
अब प्रिंस एंड्रयू रॉयल लॉज में रहेंगे और अपनी आर्थिक जरूरतें खुद पूरी करेंगे, क्योंकि किंग ने पहले ही उनकी मदद बंद कर दी थी। इस फैसले से उनकी बेटियां प्रिंसेस का खिताब रख सकेंगी। इस साल वे सैंड्रिंघम के शाही क्रिसमस समारोह में भी शामिल नहीं होंगे। अमेरिका में अभी भी एप्सटीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच जारी है, जिससे आगे और खुलासे होने की संभावना है।