अनुराग कश्यप की प्रेरणादायक कहानी, वेटर से मशहूर फिल्ममेकर बनने तक का सफर

लाइव हिंदी खबर :- मशहूर फिल्म निर्माता, निर्देशक और लेखक अनुराग कश्यप आज भारतीय सिनेमा के सबसे अलग और प्रभावशाली फिल्मकारों में गिने जाते हैं। अपनी नई फिल्म ‘बंदर’ को लेकर चर्चा में रहने वाले अनुराग का सफर आसान नहीं रहा है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 10 सितंबर 1972 को जन्मे अनुराग बचपन में वैज्ञानिक बनना चाहते थे। उन्होंने दिल्ली के हंसराज कॉलेज में जूलॉजी की पढ़ाई शुरू की लेकिन थिएटर और फिल्मों के प्रति बढ़ता लगाव उनकी जिंदगी की दिशा बदल गया। कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें फिल्मों की दुनिया में अपना करियर बनाना है।

अनुराग कश्यप की प्रेरणादायक कहानी, वेटर से मशहूर फिल्ममेकर बनने तक का सफर

सिर्फ 21 साल की उम्र में अनुराग अपने सपनों को पूरा करने मुंबई पहुंचे। उस समय उनकी जेब में केवल पांच हजार रुपए थे। शुरुआती दिनों में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई रातें उन्होंने सड़कों की बेंचों पर सोकर बिताईं और छात्रावासों में खाना खाया। फिल्मों से जुड़ने के लिए उन्होंने पृथ्वी थिएटर में वेटर की नौकरी भी की। उन्होंने कई फिल्मों की कहानियां लिखीं, लेकिन उनकी शुरुआती फिल्में रिलीज ही नहीं हो सकीं। निर्देशक के तौर पर उनकी पहली फिल्म पांच सेंसर बोर्ड की आपत्तियों के कारण रिलीज नहीं हो पाई जबकि ब्लैक फ्राइडे को भी कई साल तक इंतजार करना पड़ा।

अनुराग कश्यप के जीवन में ऐसे दौर भी आए जब उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। कोरोना काल में उनका एक बड़ा प्रोजेक्ट बीच में ही बंद हो गया जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ। लगातार तनाव और अवसाद के कारण उन्हें दो बार दिल का दौरा भी पड़ा। लेकिन इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार अपने काम पर ध्यान देते रहे। उनका मानना रहा है कि असफलता इंसान को और मजबूत बनाती है।

अनुराग कश्यप को पहली बड़ी सफलता वर्ष 1998 में फिल्म सत्या से मिली, जिसमें उन्होंने सह-लेखक के रूप में काम किया। इसके बाद देव डी और गुलाल जैसी फिल्मों ने उन्हें एक अलग सोच वाले निर्देशक के रूप में पहचान दिलाई। साल 2012 में आई गैंग्स ऑफ वासेपुर ने उन्हें देश और दुनिया में नई पहचान दी। इस फिल्म की कहानी, निर्देशन और किरदारों की खूब तारीफ हुई। इसके बाद उन्होंने कई बेहतरीन फिल्मों का निर्माण और निर्देशन किया जिनमें उड़ान, क्वीन, द लंच बॉक्स और सुपर 30 जैसी फिल्में शामिल हैं।

आज अनुराग कश्यप भारतीय सिनेमा के उन फिल्मकारों में शामिल हैं जिन्होंने अपनी अलग सोच और मेहनत से खास मुकाम हासिल किया है। उन्हें फिल्मफेयर और आईआईएफए जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। इतना ही नहीं फ्रांस सरकार ने भी उन्हें अपने सर्वोच्च सांस्कृतिक सम्मान से सम्मानित किया है। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि अगर इंसान अपने सपनों के लिए लगातार मेहनत करता रहे तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी उसे सफलता हासिल करने से नहीं रोक सकतीं।

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