लाइव हिंदी खबर :- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के मिनाब गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अब तक उनके पास ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि हमले में अमेरिकी मिसाइल का इस्तेमाल हुआ था। ट्रम्प के अनुसार उस समय पूरे क्षेत्र में कई दिशाओं से मिसाइलें दागी जा रही थीं, इसलिए यह तय करना बेहद मुश्किल है कि हमले के पीछे कौन जिम्मेदार था। ईरान का दावा है कि फरवरी में दक्षिणी ईरान के मिनाब क्षेत्र स्थित एक गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले में 175 से अधिक छात्राओं और शिक्षकों की मौत हुई थी।

इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा की थी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार अधिकारियों ने भी इस हमले को बेहद दुखद और गंभीर बताया था। घटना के बाद से ही इसके लिए जिम्मेदार पक्ष को लेकर बहस जारी है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले ट्रम्प ने इस घटना को एक दुखद गलती बताया था और कहा था कि स्कूल को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया। अब उन्होंने कहा है कि उनके पास अमेरिकी भूमिका साबित करने वाला कोई सबूत नहीं है। शुरुआती रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि जांच के दौरान अमेरिकी सैन्य भूमिका की संभावना पर विचार किया गया था।
हालांकि अब तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत पर भी दुनिया की नजर बनी हुई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं माना जा सकता। अमेरिका चाहता है कि क्षेत्र में स्थायी शांति कायम हो और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा भी सुनिश्चित रहे।
लोगों का मानना है कि ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बीच परमाणु ठिकानों की जांच को लेकर मतभेद बने हुए हैं। दूसरी ओर तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और खाड़ी देशों के बीच होने वाली बातचीत पश्चिम एशिया की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।