कैक्टस से बदली किसानों की किस्मत, भारत में उभर रहा है ब्लू गोल्ड

लाइव हिंदी खबर :- जिस कांटेदार कैक्टस को कभी किसान बेकार समझते थे, वही आज उनकी कमाई का नया जरिया बनता जा रहा है। आंध्र प्रदेश के कांदुकुर और आसपास के इलाकों में किसान अब एगेव अमेरिकाना नाम के पौधे से अच्छी आय कमा रहे हैं। पहले इस पौधे का इस्तेमाल खेतों की बाड़ बनाने के लिए किया जाता था, लेकिन अब इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि किसान इसे अब ‘ब्लू गोल्ड’ कहने लगे हैं।

कैक्टस से बदली किसानों की किस्मत, भारत में उभर रहा है ब्लू गोल्ड

एगेव पौधा मेक्सिको की मशहूर टकीला और मेजकल इंडस्ट्री का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है। वहां इसकी मदद से अरबों रुपए का कारोबार होता है। भारत में अभी इसकी संगठित खेती नहीं हो रही है, लेकिन कई राज्यों में उगने वाले जंगली एगेव को स्थानीय एजेंट इकट्ठा करके डिस्टिलरी तक पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों को पहले की तुलना में कहीं ज्यादा कीमत मिल रही है और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है।

एगेव की खेती में धैर्य और सही समय की बहुत जरूरत होती है। पौधे के बीच का हिस्सा, जिसे पीना कहा जाता है सबसे ज्यादा मूल्यवान होता है क्योंकि इसमें शुगर जमा रहती है। लेकिन जैसे ही पौधा फूल देना शुरू करता है उसकी शुगर ऊपर की ओर चली जाती है और उसकी गुणवत्ता कम हो जाती है। इसलिए किसानों को सही समय पर इसकी कटाई करनी पड़ती है। कटाई के बाद इसे जल्दी प्रोसेस करना भी जरूरी होता है ताकि इसकी गुणवत्ता बनी रहे।

भारत में एगेव से बनने वाले पेय पदार्थों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इसकी मांग और बढ़ सकती है। हालांकि यह व्हिस्की या अन्य पारंपरिक पेय पदार्थों की जगह नहीं लेगा लेकिन अपना अलग बाजार जरूर बना सकता है। यही कारण है कि कई उद्यमी अब इसकी खेती और प्रोसेसिंग में निवेश करने लगे हैं।

भारत के पास डेक्कन पठार जैसे बड़े क्षेत्र हैं जहां एगेव की खेती की अच्छी संभावनाएं मौजूद हैं। यदि वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती शुरू की जाए और किसानों को सही प्रशिक्षण मिले तो भारत भविष्य में इस क्षेत्र में बड़ी ताकत बन सकता है। एक समय बेकार समझा जाने वाला यह कैक्टस अब किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ देश के लिए नए कारोबार और रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है।

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