खाने की पैकेजिंग में स्टेपल पिन पर रोक, FSSAI का नया नियम, बढ़ेगी फूड सेफ्टी

लाइव हिंदी खबर :- अब मिठाई, नमकीन, बेकरी आइटम और ऑनलाइन मंगाए गए खाने की पैकेजिंग में स्टेपल पिन या धातु की तार नहीं लगाई जा सकेगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। संस्था का कहना है कि खाने की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी पैकेजिंग भी पूरी तरह सुरक्षित होनी चाहिए। अगर गलती से स्टेपल पिन या कोई नुकीली धातु खाने में मिल जाए, तो यह शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। FSSAI के अनुसार, स्टेपल पिन, धातु की तार, कांच या प्लास्टिक जैसी बाहरी चीजें फूड सेफ्टी के लिए बड़ा खतरा हैं।

खाने की पैकेजिंग में स्टेपल पिन पर रोक, FSSAI का नया नियम, बढ़ेगी फूड सेफ्टी

कई बार पैकेट खोलते समय स्टेपल टूटकर खाने में गिर सकती है और व्यक्ति बिना ध्यान दिए उसे निगल सकता है। इससे मुंह, गले और भोजन नली में चोट लग सकती है। गंभीर मामलों में पेट या आंतों को भी नुकसान पहुंच सकता है और अंदरूनी रक्तस्राव या संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरा और ज्यादा गंभीर हो सकता है। यह नियम उन सभी खाद्य पदार्थों पर लागू होगा जिनकी पैकेजिंग में स्टेपल पिन या धातु की तार का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मिठाई के डिब्बे, केक बॉक्स, बेकरी उत्पाद, नमकीन और स्नैक्स के पैकेट, फूड पार्सल तथा ऑनलाइन फूड डिलीवरी के पैकेट शामिल हैं। अब कंपनियों और दुकानदारों को पैकेजिंग के लिए सुरक्षित विकल्प अपनाने होंगे ताकि ग्राहकों की सेहत पर कोई खतरा न आए।

फूड खरीदते समय सबसे पहले यह देखें कि पैकेट पर कहीं स्टेपल पिन, तार या धातु की क्लिप तो नहीं लगी है। पैकेजिंग पूरी तरह सील और साफ होनी चाहिए। पैकेट कहीं से फटा या खुला नहीं होना चाहिए। एक्सपायरी डेट और मैन्युफैक्चरिंग डेट जरूर जांचें। ऑनलाइन फूड डिलीवरी मिलने पर पैकेट की सील और उसकी स्थिति ध्यान से देखें। अगर पैकेजिंग में कोई गड़बड़ी दिखाई दे तो उस खाद्य पदार्थ का इस्तेमाल न करें। FSSAI ने साफ किया है कि अगर कोई कंपनी या दुकानदार इस नियम का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर जुर्माना लगाया जा सकता है लाइसेंस रद्द किया जा सकता है और अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। यह फैसला ग्राहकों की सुरक्षा को मजबूत बनाने और खाद्य पदार्थों को पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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