लाइव हिंदी खबर :- दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पुलिस कार्रवाई की जांच कर रही कमेटी को अब तक बहुत कम शिकायतें मिली हैं। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि ऑनलाइन पोर्टल, ईमेल और अन्य माध्यमों से शिकायतें मांगे जाने के बावजूद लोगों ने बहुत कम जानकारी साझा की। इसी वजह से कमेटी अभी किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है। पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने शिकायतें जुटाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया था।

इसके अलावा देशभर के 149 अखबारों में नोटिस प्रकाशित कराए गए थे। ईमेल, डाक और कार्यालय में सीधे शिकायत देने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। कमेटी के अनुसार 29 अक्टूबर की बैठक में केवल एक शिकायतकर्ता हलफनामे के साथ पहुंचा था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दावा किया कि उनके पास प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती से जुड़े वीडियो और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने की अनुमति किसने दी थी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि पीड़ितों की वास्तविक संख्या और उनकी शिकायतों की पुष्टि जरूरी है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को अपने पास मौजूद वीडियो, हलफनामे और अन्य सामग्री कमेटी को सौंपने की अनुमति दी। कोर्ट ने साफ किया कि पीड़ितों की ओर से दी गई जानकारी पर भी विचार किया जाएगा। शिकायतकर्ता चाहें तो अपनी पहचान बताए बिना शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी से कहा है कि वह शिकायतों का इंतजार करते हुए जांच को अनिश्चित समय तक न रोके। उपलब्ध सामग्री के आधार पर तथ्य जुटाए और एक महीने में शुरुआती रिपोर्ट पेश करे। यह जांच प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों, दोनों के खिलाफ लगाए गए हिंसा के आरोपों से जुड़ी है।