लाइव हिंदी खबर :- जापान ने अपनी रक्षा नीति में बड़ा बदलाव करते हुए अब दूसरे देशों को घातक हथियार बेचने का फैसला किया है। इस निर्णय के बाद जापान फाइटर जेट, मिसाइल और वॉरशिप जैसे आधुनिक सैन्य उपकरणों का निर्यात कर सकेगा। सरकार का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत उठाया गया है और हथियार सिर्फ उन्हीं देशों को दिए जाएंगे जो उनका जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने का भरोसा देंगे।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान ने शांतिवादी नीति अपनाई थी जिसके तहत उसने खुद को युद्ध से दूर रखा और हथियारों के निर्यात पर सख्त रोक लगा दी थी। 1976 से लागू नियमों के कारण जापान केवल गैर-घातक सैन्य उपकरण ही बेच सकता था। अब इस लंबे समय से चली आ रही नीति में बदलाव कर जापान ने खुद को वैश्विक रक्षा बाजार में उतारने का फैसला लिया है।
इस नए फैसले के तहत जापान ने ऑस्ट्रेलिया के साथ करीब 7 अरब डॉलर का बड़ा समझौता भी किया है। इस डील के अंतर्गत जापानी कंपनी ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के लिए आधुनिक वॉरशिप तैयार करेगी। यह समझौता जापान के लिए अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में मजबूत शुरुआत माना जा रहा है और इससे अन्य देशों के साथ भी ऐसे समझौतों के रास्ते खुल सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक जापान का यह फैसला मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते तनाव, चीन की बढ़ती ताकत, उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षण और रूस-यूक्रेन जैसे संघर्षों ने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया है। ऐसे माहौल में जापान अब सिर्फ शांतिवादी देश नहीं रहना चाहता बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है।
इस फैसले का असर जापान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। रक्षा उद्योग को नए बाजार मिलेंगे, जिससे कंपनियों की वृद्धि तेज होगी। साथ ही नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे और सप्लाई चेन मजबूत होगी। लंबे समय तक सीमित रहने के बाद अब जापान की डिफेंस इंडस्ट्री को वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने का मौका मिलेगा।