ट्रम्प का चीन दौरा और बड़े समझौतों की उम्मीद, बीजिंग में अमेरिका-चीन रिश्तों की नई परीक्षा

लाइव हिंदी खबर :- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक बार फिर चीन दौरे को लेकर चर्चा में हैं। 2017 के बाद यह उनका पहला चीन दौरा है और इसे दुनिया की सबसे अहम कूटनीतिक बैठकों में माना जा रहा है। ट्रम्प 13 से 15 मई तक बीजिंग में रहेंगे, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, ताइवान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ईरान से जुड़े कई बड़े मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है। दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी हुई हैं क्योंकि इससे आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और कारोबार दोनों पर असर पड़ सकता है।

ट्रम्प का चीन दौरा और बड़े समझौतों की उम्मीद, बीजिंग में अमेरिका-चीन रिश्तों की नई परीक्षा

इस दौरे की सबसे खास बात यह है कि ट्रम्प अकेले नहीं गए हैं। उनके साथ दुनिया की बड़ी कंपनियों के कई प्रमुख कारोबारी भी चीन पहुंचे हैं। इनमें टेस्ला के एलॉन मस्क, एप्पल के सीईओ टिम कुक और बोइंग कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। कुल 17 बड़े अमेरिकी कारोबारी इस दौरे का हिस्सा बने हैं। माना जा रहा है कि अमेरिका चीन के साथ व्यापारिक रिश्तों को नए स्तर पर ले जाना चाहता है। हालांकि एनवीडिया के प्रमुख जेनसन हुआंग इस दौरे में शामिल नहीं हुए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरे के दौरान बोइंग विमानों की बड़ी डील हो सकती है। बताया जा रहा है कि चीन सैकड़ों बोइंग विमान खरीदने पर विचार कर रहा है। अगर यह समझौता होता है तो इसकी कीमत करीब 9 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। इसमें बोइंग 737 मैक्स, 787 ड्रीमलाइनर और 777X जैसे आधुनिक विमान शामिल हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह अब तक का सबसे बड़ा विमान सौदा साबित हो सकता है। इससे अमेरिकी विमान उद्योग को बड़ी मजबूती मिलेगी।

ट्रम्प और शी जिनपिंग के बीच व्यापारिक टैरिफ विवाद पर भी बातचीत होगी। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध जैसी स्थिति बनी रही है। इसके अलावा ताइवान का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच तनाव की बड़ी वजह बना हुआ है। अमेरिका ताइवान को हथियार देने की तैयारी में है जबकि चीन इसका विरोध करता रहा है। दोनों नेता रेयर अर्थ मिनरल्स और एआई टेक्नोलॉजी को लेकर भी बातचीत करेंगे क्योंकि ये भविष्य की अर्थव्यवस्था और रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।

चीन और अमेरिका के बीच ईरानी तेल को लेकर भी मतभेद हैं। अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान से तेल खरीद कम करे ताकि तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सके। वहीं चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता देता है और सस्ता तेल खरीदने की नीति जारी रखना चाहता है। माना जा रहा है कि ट्रम्प इस मुद्दे को भी बातचीत में उठाएंगे। इस दौरे से साफ है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और चीन के रिश्ते दुनिया की राजनीति और वैश्विक बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।

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