लाइव हिंदी खबर :- इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में ईरान की मौजूदा स्थिति को लेकर कई बड़े दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई जीवित हैं लेकिन उनकी पकड़ अपने पिता अली खामेनेई जितनी मजबूत नहीं है। नेतन्याहू के मुताबिक मुजतबा इस समय किसी गुप्त बंकर या सुरक्षित ठिकाने से हालात संभालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान के अंदर राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही है और सत्ता के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। नेतन्याहू ने कहा कि ईरानी सरकार इस समय सबसे ज्यादा अपनी ही जनता से डरी हुई है।

उनके अनुसार हाल के महीनों में महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट को लेकर लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ा है। उन्होंने दावा किया कि इजराइल और अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान में विरोध प्रदर्शन और तेज हुए हैं। नेतन्याहू का कहना है कि सरकार को डर है कि अगर हालात और बिगड़े तो बड़े स्तर पर जनविद्रोह हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के भीतर कई गुट अब अलग-अलग राय रखने लगे हैं जिससे शासन कमजोर दिखाई दे रहा है। इजराइली प्रधानमंत्री ने दावा किया कि फरवरी में अमेरिका और इजराइल की संयुक्त कार्रवाई के दौरान मुजतबा खामेनेई घायल हो गए थे।
रिपोर्ट्स के अनुसार उस हमले में ईरान के कई बड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया था। नेतन्याहू के मुताबिक मुजतबा को गंभीर चोटें आईं और अब भी उनका इलाज चल रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है लेकिन इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा पैदा कर दी है। ईरान की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। नेतन्याहू ने इंटरव्यू में कहा कि ईरान अब भी परमाणु कार्यक्रम पर काम कर रहा है और उसके पास समृद्ध यूरेनियम का भंडार मौजूद है। उन्होंने दावा किया कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती तो ईरान कुछ ही महीनों में परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में पहुंच सकता था।
उन्होंने कहा कि इजराइल और अमेरिका दोनों इस खतरे को गंभीरता से ले रहे हैं और जरूरत पड़ने पर आगे भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि ईरान कमजोर होगा तो हिजबुल्लाह, हमास और हूती जैसे संगठनों की ताकत भी घटेगी। उनके मुताबिक इन संगठनों को लंबे समय से ईरान का समर्थन मिलता रहा है। उन्होंने कहा कि इजराइल आने वाले समय में अपनी सुरक्षा को और मजबूत करने पर ध्यान देगा। साथ ही अमेरिका के साथ तकनीक, मिसाइल डिफेंस और खुफिया सहयोग को भी बढ़ाया जाएगा।