लाइव हिंदी खबर :- पोलैंड और यूक्रेन के बीच एक पुराने ऐतिहासिक मुद्दे को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पोलैंड के राष्ट्रपति कारो्ल नावरोत्स्की ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से यूक्रेनियन इंसर्जेंट आर्मी (UPA) को दिए जा रहे सम्मान को वापस लेने की मांग की है। पोलैंड का कहना है कि अगर इस मामले में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो जेलेंस्की को दिया गया देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भी वापस लिया जा सकता है। यह विवाद तब सामने आया जब राष्ट्रपति जेलेंस्की ने यूक्रेन की एक विशेष कमांडो यूनिट का नाम UPA के नायकों के नाम पर रखने का फैसला किया।

इसके बाद पोलैंड ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। पोलैंड का मानना है कि UPA और उससे जुड़े संगठन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश नागरिकों के खिलाफ हिंसक अभियानों में शामिल थे। वहीं यूक्रेन में इन्हें देश की आजादी के लिए लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के रूप में देखा जाता है। पोलिश अधिकारियों के अनुसार UPA ने वर्तमान पश्चिमी यूक्रेन के क्षेत्रों में करीब एक लाख पोलिश नागरिकों की हत्या की थी। पोलैंड इन घटनाओं को जनसंहार मानता है और लंबे समय से इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाता रहा है। इसी वजह से UPA से जुड़ा कोई भी सम्मान या सरकारी मान्यता पोलैंड के लिए बेहद संवेदनशील विषय है।
रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रपति कारो्ल नावरोत्स्की ने वर्ष 2023 में जेलेंस्की को दिए गए पोलैंड के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल को वापस लेने की पहल का समर्थन किया है। हालांकि अभी इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है लेकिन पोलैंड के सख्त रुख से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यूक्रेन और पोलैंड आज कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर एक-दूसरे के सहयोगी हैं लेकिन UPA का इतिहास दोनों देशों के बीच अब भी विवाद का कारण बना हुआ है। जहां यूक्रेन इसे राष्ट्रीय गौरव से जोड़कर देखता है वहीं पोलैंड इसे अपने नागरिकों के खिलाफ हुए अत्याचारों की याद मानता है। यही ऐतिहासिक मतभेद अब दोनों देशों के संबंधों के सामने एक नई चुनौती बनकर उभरा है।