बचपन की यादों में खोए महेश भट्ट, मां को याद कर बोले जिंदगी भविष्य में नहीं, इसी पल में है

लाइव हिंदी खबर :- मशहूर फिल्ममेकर और लेखक महेश भट्ट ने मुंबई में आयोजित कार्यक्रम न सर्च ऑफ ट्रुथ में अपने जीवन के कई भावनात्मक और प्रेरणादायक अनुभव साझा किए। वर्सोवा के आरडीएक्स स्टूडियो में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि लोग अक्सर अपनी खुशियों और सपनों को भविष्य के लिए टालते रहते हैं जबकि असली जिंदगी इसी पल में छिपी होती है। उनके मुताबिक इंसान को हर सांस और हर पल की अहमियत समझनी चाहिए क्योंकि यही जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई है।

बचपन की यादों में खोए महेश भट्ट, मां को याद कर बोले जिंदगी भविष्य में नहीं, इसी पल में है

महेश भट्ट ने अपने शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए मशहूर निर्देशक राज खोसला की एक सीख साझा की। उन्होंने बताया कि राज खोसला हमेशा कहते थे शून्य से शुरुआत करना कोई कमजोरी नहीं बल्कि एक नई शुरुआत का सबसे मजबूत आधार है। महेश भट्ट का मानना है कि जीवन में गिरना या असफल होना गलत नहीं है बल्कि हर असफलता इंसान को कुछ नया सिखाती है। उन्होंने कहा कि चार साल की उम्र में ही उनके मन में फिल्मों और कहानियों के प्रति लगाव पैदा हो गया था और तभी से उन्होंने अपने सपनों का पीछा करना शुरू कर दिया था।

कार्यक्रम के दौरान महेश भट्ट अपनी मां को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने बचपन का एक खास किस्सा सुनाया जब उनकी मां काफी बीमार थीं। उन्हें खुश करने के लिए उन्होंने रात में जुगनू पकड़कर मां के बालों में सजा दिए थे। इस घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन के ऐसे छोटे और भावनात्मक पल ही इंसान की सोच और रचनात्मकता को आकार देते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी कई फिल्में और कहानियां उनके निजी अनुभवों, संघर्षों और भावनाओं से प्रेरित रही हैं।

महेश भट्ट ने कहा कि युवावस्था में वह हमेशा दूसरों से अलग दिखना चाहते थे लेकिन समय के साथ उन्हें एहसास हुआ कि असली खुशी लोगों से जुड़ने और रिश्तों को समझने में है। उन्होंने कहा कि सफलता की दौड़ कभी खत्म नहीं होती, इसलिए इंसान को भविष्य की चिंता छोड़कर वर्तमान में जीना सीखना चाहिए। उनके अनुसार संतोष और खुशी किसी बड़ी उपलब्धि में नहीं बल्कि रोजमर्रा के जीवन के छोटे-छोटे पलों में छिपी होती है।

कार्यक्रम के अंत में सवाल-जवाब के दौरान महेश भट्ट ने युवाओं और माता-पिता को भी महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि बच्चे माता-पिता की बातों से ज्यादा उनके व्यवहार से सीखते हैं। इसलिए उन्हें आदेश देने के बजाय उनकी बातें सुनना और समझना जरूरी है। वहीं युवाओं से उन्होंने कहा कि असफलता से कभी डरना नहीं चाहिए क्योंकि जीवन की सबसे बड़ी सीख अक्सर हार और संघर्ष से ही मिलती है। उनके मुताबिक जो इंसान गिरकर फिर उठना सीख जाता है वही जिंदगी में आगे बढ़ता है।

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