लाइव हिंदी खबर :- हाल के घटनाक्रमों ने अमेरिका और ब्रिटेन के रिश्तों में तनाव को उजागर कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कथित तौर पर इस बात से नाराज बताए जा रहे हैं कि ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष में ब्रिटेन ने खुलकर समर्थन नहीं दिया। इसी मुद्दे को लेकर अब कूटनीतिक स्तर पर नई हलचल देखने को मिल रही है जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अस्थिरता बढ़ सकती है। सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अंदर एक ईमेल चर्चा में ऐसे विकल्पों पर विचार किया गया जिनमें उन देशों के खिलाफ कार्रवाई शामिल थी जो अमेरिका के साथ पूरी तरह नहीं खड़े हुए।

इनमें NATO में उनकी भूमिका सीमित करना या अहम पदों से हटाना जैसे कदम शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है लेकिन इससे सहयोगी देशों के बीच असहजता जरूर बढ़ी है।इस पूरे मामले में फॉकलैंड द्वीप एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका इस मुद्दे पर अपनी नीति की समीक्षा कर सकता है जो ब्रिटेन के लिए चिंता का कारण बन सकता है। अर्जेंटीना जिसे इन द्वीपों पर अपना दावा मजबूत मानता है इस खबर से उत्साहित नजर आ रहा है और इसे अपने पक्ष में संभावित अवसर के रूप में देख रहा है।
फॉकलैंड द्वीप को लेकर ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच विवाद कोई नया नहीं है। 1982 में दोनों देशों के बीच युद्ध भी हो चुका है जिसमें अंततः ब्रिटेन ने नियंत्रण हासिल कर लिया था। तब से यह मुद्दा समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठता रहा है और अब एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है। इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ अमेरिका और उसके सहयोगियों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी पड़ेगा। अगर अमेरिका अपने पुराने रुख में बदलाव करता है तो इससे अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों की दिशा बदल सकती है। ऐसे फैसले आने वाले समय में नई कूटनीतिक चुनौतियां पैदा कर सकते हैं और देशों के बीच भरोसे को भी प्रभावित कर सकते हैं।