लाइव हिंदी खबर :- मिली ताजा जानकारी के अनुसार आपको बता दें कि अमेरिका में भारत के लिए व्यापार से जुड़ी एक बड़ी चिंता सामने आई है। अमेरिकी सीनेट ने भारत समेत पांच देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने वाले प्रस्ताव को भारी बहुमत से मंजूरी दी है। वोटिंग में 86 सांसदों ने बिल के समर्थन में मतदान किया जबकि 11 सांसद इसके खिलाफ रहे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य रूस की तेल बिक्री से होने वाली कमाई को प्रभावित करना बताया जा रहा है।

प्रस्ताव में भारत के साथ चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान को भी शामिल किया गया है। इन देशों पर कार्रवाई का आधार रूस से तेल या अन्य ऊर्जा उत्पादों की खरीद को माना गया है। शुरुआत में इस प्रस्ताव में 500% तक टैरिफ लगाने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में संभावित दर को घटाकर 100% तक कर दिया गया। सीनेट से मंजूरी मिलने के बावजूद यह बिल अभी अमेरिकी कानून नहीं बना है। अब इसे अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भेजा जाएगा। वहां मंजूरी मिलने के बाद इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही यह प्रस्ताव कानून का रूप ले सकेगा।
प्रस्ताव में ईरान के साथ कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियों पर प्रतिबंध से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी सामान पर 500% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने की बात कही गई है। यह अधिकार पांच साल तक लागू रह सकता है। भारत के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस लंबे समय से देश का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बना हुआ है। जून 2026 में भारत ने रूस से करीब 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा जो कुल तेल आयात का लगभग 52.4% था। मई की तुलना में जून में रूसी तेल खरीद करीब 39% बढ़ी। ऐसे में अगर अमेरिकी बिल कानून बनता है तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है।