लाइव हिंदी खबर :- बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने हालिया बयान को लेकर उठे विवाद के बाद माफी मांग ली है। नागपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था बल्कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के प्रति सम्मान व्यक्त करना था। शास्त्री ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज उनके लिए अत्यंत सम्माननीय हैं और उनके बारे में नकारात्मक सोचने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने बताया कि वे केवल शिवाजी महाराज की अपने गुरु समर्थ रामदास स्वामी के प्रति भक्ति और समर्पण का उदाहरण दे रहे थे। उनके अनुसार इस संदर्भ को अधूरा दिखाकर विवाद खड़ा किया गया।

नागपुर के एक कार्यक्रम में दिए गए बयान में शास्त्री ने कहा था कि शिवाजी महाराज युद्धों से थककर अपने गुरु के पास पहुंचे थे और उन्होंने अपना मुकुट उनके चरणों में रख दिया था। इस बयान को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई लोगों ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत बताया और आपत्ति जताई। इस विवाद ने राजनीतिक रूप भी ले लिया। कई नेताओं ने इस बयान की आलोचना की और इसे इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास बताया। कुछ नेताओं ने तो इस तरह के बयानों पर रोक लगाने की मांग भी की। वहीं कुछ ने जिम्मेदारी से बोलने की सलाह दी और कहा कि ऐतिहासिक विषयों पर टिप्पणी करते समय सावधानी जरूरी है।
पूरे विवाद के बीच शास्त्री ने साफ कहा कि उनका किसी भी तरह का गलत इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर उनके शब्दों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे दिल से माफी मांगते हैं। उन्होंने यह भी अपील की कि ऐसे मुद्दों पर समाज में आपसी मतभेद न बढ़ाएं बल्कि एकता और सम्मान बनाए रखें।