लाइव हिंदी खबर :- सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और लोगों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि रेबीज से संक्रमित और बेहद खतरनाक कुत्तों को जरूरत पड़ने पर इंजेक्शन देकर मारा जा सकता है। कोर्ट ने साफ कहा कि आम लोगों की जान की सुरक्षा सबसे जरूरी है और इस मामले में लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई भी हो सकती है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि गरिमा के साथ जीने का अधिकार तभी संभव है जब लोग सड़कों पर बिना डर के चल सकें।

कोर्ट ने माना कि कई शहरों में आवारा कुत्तों के हमले गंभीर समस्या बन चुके हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर बढ़ते हमलों को देखते हुए अदालत ने राज्यों और नगर निकायों को जिम्मेदारी से काम करने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राजस्थान, तमिलनाडु और गुजरात की घटनाओं का जिक्र किया। अदालत ने कहा कि कई जगहों पर छोटे बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं और अस्पतालों में कुत्तों के काटने के मामले तेजी से बढ़े हैं। कोर्ट का मानना है कि ऐसी घटनाएं लोगों के मन में डर पैदा कर रही हैं और प्रशासन पर भरोसा कमजोर कर रही हैं।
कोर्ट ने सभी राज्यों को एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर बढ़ाने और नसबंदी अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्कूल, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने को कहा गया है। अदालत ने यह भी कहा कि एंटी-रेबीज दवाइयों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कहा था कि यदि किसी व्यक्ति पर आवारा कुत्तों का हमला होता है तो स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ लापरवाही करने वालों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल पशु संरक्षण का नहीं बल्कि मानव सुरक्षा का भी है। कोर्ट ने कहा कि नियमों का पालन सख्ती से होना चाहिए ताकि लोगों की जान को खतरा न हो।