लाइव हिंदी खबर :- ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई फिल्म कर्तव्य एक गंभीर सामाजिक ड्रामा बनने की कोशिश करती है। फिल्म जातिवाद, ऑनर किलिंग, भ्रष्ट सिस्टम और पाखंडी बाबाओं जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठाती है। कहानी सुनने में मजबूत लगती है और कलाकारों की टीम भी दमदार है लेकिन फिल्म अपने विषय के अनुसार असर पैदा करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाती। कई जगह ऐसा महसूस होता है कि फिल्म बहुत कुछ कहना चाहती है लेकिन उसे सही तरीके से सामने नहीं रख पाती।

फिल्म की कहानी हरियाणा के काल्पनिक कस्बे झामली में दिखाई गई है। यहां सैफ अली खान पुलिस अफसर पवन के किरदार में नजर आते हैं जो अपने काम को सिर्फ नौकरी नहीं बल्कि जिम्मेदारी मानता है। कहानी तब मोड़ लेती है जब एक पत्रकार इलाके के प्रभावशाली बाबा आनंद श्री के राज उजागर करने की कोशिश करती है और उसकी हत्या हो जाती है। इसके बाद कहानी बच्चों के गायब होने, जातिगत भेदभाव और समाज के दबाव जैसे मुद्दों के बीच घूमती रहती है।
फिल्म कई जगह यह सवाल उठाती है कि इंसान का असली कर्तव्य क्या होना चाहिए। परिवार, समाज और सच के बीच संघर्ष को दिखाने की कोशिश की गई है लेकिन कहानी की पकड़ हर समय मजबूत नहीं रह पाती। कुछ मोड़ पहले से अंदाजा लग जाते हैं और थ्रिल का असर धीरे-धीरे कम हो जाता है।
फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी सैफ अली खान की एक्टिंग है। उन्होंने एक ईमानदार और भीतर से टूटते पुलिस अफसर के किरदार को काफी सच्चाई से निभाया है। उनके चेहरे के भाव और संवादों में तनाव साफ नजर आता है। लंबे समय बाद सैफ इस तरह के गंभीर किरदार में प्रभाव छोड़ते दिखाई देते हैं।
रसिका दुग्गल और संजय मिश्रा जैसे कलाकार भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं लेकिन उनके किरदारों को ज्यादा विस्तार नहीं मिल पाया। वहीं युधवीर अहलावत ने अपने अभिनय से कई दृश्यों में भावनात्मक असर छोड़ा है। हालांकि फिल्म का खलनायक उतना प्रभावी नहीं बन पाया जितनी कहानी को जरूरत थी।
कर्तव्य एक जरूरी विषय पर बनी फिल्म है और इसकी मंशा अच्छी दिखाई देती है। लेकिन मजबूत कहानी और गहराई की कमी के कारण यह फिल्म पूरी तरह दर्शकों को बांध नहीं पाती। फिल्म में कई ऐसे पल हैं जो सोचने पर मजबूर करते हैं लेकिन कुल मिलाकर इसका असर सीमित रह जाता है। अगर कहानी थोड़ी और कसावट के साथ लिखी जाती तो यह कहीं ज्यादा दमदार फिल्म बन सकती थी।