लाइव हिंदी खबर :- अमेरिका अब होर्मुज के बाद मलक्का स्ट्रेट पर भी अपनी रणनीति पकड़ मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। हाल ही में इंडोनेशिया के साथ हुआ रक्षा समझौता किसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है। इस डील के मुताबिक अमेरिकी सैन्य विमान को इंडोनेशिया के हवाई क्षेत्र में आसानी से आवाजाही की अनुमति मिल गई है। जिससे क्षेत्र में अमेरिका की मौजूदगी और बढ़ सकती है।

मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है। यह हिंद महासागर को पूर्वी एशिया से जोड़ता है और यहां से करीब 40% वैसी व्यापार और 30% तेल सप्लाई गुजरती है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे एक अहम चेक पॉइंट बनाती है, जहां किसी भी तरह की हलचल का सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
चीन के लिए मलक्का स्ट्रेट एक बड़ी रणनीति कमजोरी माना जाता है। चीन का लगभग 80% तेल आयात इसी रास्ते से किया जाता है। इस वजह से वह लंबे समय से इस पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। चीन के पूर्व राष्ट्रपति हू जिंताओ ने इसे मलक्का डिलेमा कहा था, जो इस क्षेत्र की अहमियत को दर्शाता है।
भारत के लिए भी मलक्का स्ट्रेट बहुत महत्वपूर्ण है। देश का लगभग 55% व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है। अंडमान और निकोबार दीप समूह की भौगोलिक स्थिति भारत को इस क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त देती है। यहां स्थित सैनिक ठिकाने समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच हुआ रक्षा समझौता केवल सैन्य सहयोग से सीमित नहीं है, बल्कि यह इंडोपेसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका अब दुनिया के प्रमुख समुद्री रास्तों पर अपनी पकड़ को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है, ताकि व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर वह अपनी मजबूत पकड़ बना सके और समय आने पर वह उसका इस्तेमाल या फिर कहे तो फायदा उठा सके। या संबंधित देशों पर दवाव बना सके।