लाइव हिंदी खबर :- ईरान के साथ सीजफायर बढ़ाने के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कड़ा रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि भले ही हमले फिलहाल रोके गए हैं लेकिन ईरान पर दबाव बनाए रखने की नीति जारी रहेगी। ट्रम्प के इस बयान से साफ है कि शांति की कोशिशों के साथ-साथ सख्ती भी जारी रखी जा रही है।

ट्रम्प ने दावा किया कि समुद्री नाकेबंदी के कारण ईरान को रोज भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। उनके अनुसार इस वजह से देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है और जरूरी खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी दबाव के चलते ईरान होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की कोशिश कर रहा है।
दूसरी ओर ईरान का कहना है कि जब तक नाकेबंदी नहीं हटाई जाती तब तक किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि बातचीत के लिए माहौल तभी बनेगा जब अमेरिका अपनी सख्ती कम करेगा। इससे दोनों देशों के बीच बातचीत की राह अभी मुश्किल नजर आ रही है।
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी सामने आई है। जानकारी के अनुसार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख ने अमेरिका से अपील की थी कि कुछ समय के लिए हमले रोके जाएं ताकि ईरान को बातचीत के लिए मौका मिल सके। इस अपील के बाद ही सीजफायर बढ़ाने का फैसला लिया गया।
हालात ऐसे हैं कि एक तरफ बातचीत की कोशिशें हो रही हैं तो दूसरी ओर तनाव भी बना हुआ है। अलग-अलग देशों की प्रतिक्रियाएं और चेतावनियां इस स्थिति को और जटिल बना रही हैं। अब यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान निकालते हैं या फिर तनाव दोबारा बढ़ता है।